महाराष्ट्र में SIR को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई टली, SC में मामला लंबित होने का दिया हवाला

HIGHLIGHTS
- चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के 24 नवंबर 2025 के अंतरिम आदेश का हवाला दिया।
- आयोग के मुताबिक SIR से जुड़े कई मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है।
- याचिकाकर्ता सागर गवई ने महाराष्ट्र के मतदाताओं के हितों की सुरक्षा की मांग की।
मुंबई। महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामले में दायर याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है।
अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में पहले से सुनवाई चल रही है। ऐसे में हाईकोर्ट इस संबंध में कोई आदेश पारित नहीं कर सकता। इसी आधार पर मामले की सुनवाई तीन सप्ताह के लिए स्थगित कर दी गई।
SIR से जुड़े मामले की SC में पहले से सुनवाई
चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी ने अदालत को बताया कि SIR से संबंधित कई मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट पहले से सुनवाई कर रहा है।
उन्होंने 24 नवंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश का हवाला देते हुए कहा कि अलग-अलग हाईकोर्ट और राज्यों को ऐसे मामलों में स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने से रोका गया है। उन्होंने कहा कि यह अंतरिम आदेश अभी भी प्रभावी है और मौजूदा याचिका पर भी लागू होता है।
वहीं, याचिकाकर्ता सागर गवई की ओर से अधिवक्ता प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि याचिका का दायरा सीमित है। उन्होंने महाराष्ट्र के मतदाताओं के हितों की सुरक्षा की मांग करते हुए कहा कि सुनवाई पूरी होने तक नाम हटाने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जा सकती है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत से किया इनकार
अदालत ने माना कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में महाराष्ट्र का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। हालांकि, SIR से जुड़े मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी होने के कारण उसी विषय पर समानांतर कार्रवाई की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि 8 अक्टूबर दूर नहीं है।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से मांगी गई अंतरिम राहत देने से भी इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यह जनहित याचिका नहीं, बल्कि रिट याचिका है।
सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित रहने के दौरान मतदाताओं के नाम नहीं हटाने का आदेश देना उचित नहीं होगा। इसके साथ ही अदालत ने प्रक्रियागत सीमाओं को ध्यान में रखते हुए मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय कर दी।
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