मुजफ्फरनगर: बाबू नारायण सिंह की 39वीं पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब

HIGHLIGHTS
- मुजफ्फरनगर के नसीरपुर स्थित प्रेरणा स्थल पर स्वर्गीय बाबू नारायण सिंह की 39वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई।
- कार्यक्रम में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे लोगों ने किसान नेता के योगदान को याद कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
- सांसद चंदन चौहान ने बाबू नारायण सिंह के आदर्शों और जनसेवा की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
मुजफ्फरनगर के ग्राम नसीरपुर स्थित प्रेरणा स्थल पर रविवार को उत्तर प्रदेश के प्रथम उपमुख्यमंत्री, किसान नेता और जनसेवा की राजनीति के प्रतीक स्वर्गीय बाबू नारायण सिंह की 39वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
सुबह 9 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम में बिजनौर, मुजफ्फरनगर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से हजारों की संख्या में किसान, सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और आम लोग पहुंचे। सभी ने पुष्प अर्पित कर स्वर्गीय बाबू नारायण सिंह को श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और हवन-पूजन के साथ हुआ। इसके बाद लोगों ने स्वर्गीय बाबू नारायण सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। आयोजन के दौरान उनका संदेश "संघर्ष ही जीवन है" लोगों के लिए प्रेरणा बना रहा। गोविन्द वर्मा संपादक 'दैनिक देहात' ने भी फार्म हाउस पहुंचकर स्वर्गीय बाबू नारायण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की
किसानों और गरीबों के हितों के लिए समर्पित रहा जीवन
श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि बाबू नारायण सिंह ने राजनीति को सत्ता हासिल करने का जरिया नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम माना। उन्होंने अपने पूरे जीवन में किसानों, मजदूरों, गरीबों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 1967 में उत्तर प्रदेश की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार में प्रदेश के प्रथम उपमुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने किसान हित, ग्रामीण विकास और पारदर्शी प्रशासन को प्राथमिकता दी। उनकी सादगी, ईमानदारी और जनता से सीधा जुड़ाव आज भी लोगों को प्रेरित करता है।
चंदन चौहान ने बताया जनता के विश्वास को सबसे बड़ी ताकत
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए बिजनौर सांसद चंदन चौहान ने कहा कि उनके दादा स्वर्गीय बाबू नारायण सिंह का जीवन उनके लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास ही उनके परिवार की सबसे बड़ी पूंजी है और वह उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जनसेवा के लिए कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, "मेरे दादाजी ने अपना पूरा जीवन किसानों, गरीबों और आम जनता के लिए समर्पित किया। आज मैं उनकी तीसरी पीढ़ी के प्रतिनिधि के रूप में जनता की सेवा कर रहा हूं। उनका आशीर्वाद और जनता का विश्वास मेरी सबसे बड़ी ताकत है। मैं संकल्प लेता हूं कि उनके आदर्शों, सादगी और जनसेवा की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हर व्यक्ति की आवाज बनकर कार्य करता रहूंगा।"
आदर्शों और जनसेवा के रास्ते पर चलने का संकल्प
कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने बाबू नारायण सिंह के राजनीतिक और सामाजिक योगदान को याद करते हुए कहा कि वर्तमान समय में उनके जैसे जननेताओं की जरूरत और अधिक महसूस हो रही है।
श्रद्धांजलि सभा के समापन पर उपस्थित हजारों लोगों ने उनके आदर्शों का पालन करने और समाज सेवा के लिए समर्पित रहने का संकल्प लिया।
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