मुजफ्फरनगर: गन्ना नियंत्रण आदेश का ड्राफ्ट रद्द, किसानों ने जताई खुशी

मुजफ्फरनगर में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित गन्ना (नियंत्रण) आदेश-2026 को वापस लिए जाने के बाद गन्ना किसानों और विभिन्न किसान संगठनों में उत्साह का माहौल देखने को मिला है। केंद्र सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की ओर से जारी आधिकारिक ज्ञापन में ड्राफ्ट शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर-2026 को निरस्त करने की जानकारी दी गई है। किसानों और संगठनों ने इस निर्णय को बड़ी सफलता के रूप में देखा है।
निर्णय के बाद भारतीय किसान यूनियन (सेवक) के कार्यकर्ताओं ने मिठाई बांटकर खुशी जाहिर की और इसे लंबे समय से चल रहे आंदोलन और प्रयासों का परिणाम बताया। भाकियू (सेवक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनीत त्यागी ने बताया कि प्रस्तावित आदेश में यह प्रावधान शामिल था कि किसी भी चीनी मिल के 15 किलोमीटर के दायरे में नया कोल्हू या खांडसारी इकाई स्थापित नहीं की जा सकेगी।

उन्होंने कहा कि यदि यह नियम लागू हो जाता, तो किसानों के लिए गन्ना बिक्री के विकल्प काफी सीमित हो जाते और उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती। इसके अलावा, स्थानीय कोल्हू और खांडसारी इकाइयां अक्सर चीनी मिलों की तुलना में 15 से 20 रुपये प्रति क्विंटल अधिक कीमत पर गन्ना खरीदती हैं, जिससे किसानों को बेहतर लाभ मिलता है।
विनीत त्यागी के अनुसार, यह प्रस्ताव पूरी तरह किसानों के हितों के विपरीत था। लगातार विरोध और किसान संगठनों की मांगों के बाद केंद्र सरकार ने किसानों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस ड्राफ्ट आदेश को वापस लेने का निर्णय लिया है। उन्होंने किसानों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि किसान किसी जाति या धर्म से नहीं, बल्कि केवल किसान पहचान से जुड़ा होता है।
उन्होंने यह भी मांग उठाई कि किसानों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
भाकियू (सेवक) ने इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय राज्य मंत्री तथा राष्ट्रीय लोकदल प्रमुख चौधरी जयंत सिंह के प्रति आभार व्यक्त किया है। संगठन का कहना है कि इस निर्णय से गन्ना किसानों के साथ-साथ कोल्हू संचालकों और खांडसारी उद्योग से जुड़े हजारों लोगों को राहत मिली है।
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