नारायण राणे ने राजनीति से संन्यास की अटकलों को किया खारिज

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी सांसद नारायण राणे ने हाल ही में अपने राजनीतिक संन्यास को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया है। राणे ने स्पष्ट किया कि सिंधुदुर्ग में एक जनसभा में दिए गए उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया।
क्या कहा था राणे ने?
सोमवार को मीडिया से बातचीत में राणे ने कहा कि उन्होंने कभी भी संन्यास लेने का संकेत नहीं दिया। उनका कहना था कि उन्होंने बस यह कहा था कि अगर वह जनता के लिए अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाए तो भविष्य में अपने विकल्पों पर विचार करेंगे। राणे ने याद दिलाया कि शनिवार को जनसभा में उन्होंने अपने बेटों, विधायक नीलेश राणे और मंत्री नितेश राणे का जिक्र करते हुए कहा था कि “एक समय पर रुकना पड़ता है और शरीर की भी अपनी सीमाएं होती हैं।” इस बयान को गलत अर्थ देकर कई मंचों पर यह चर्चा शुरू हो गई कि राणे राजनीति छोड़ने का विचार कर रहे हैं।
भाजपा उनके राजनीतिक सफर की अंतिम पार्टी
राणे ने यह भी कहा कि अपने लंबे राजनीतिक जीवन में वे शिवसेना, कांग्रेस और बीजेपी से जुड़े रहे हैं, लेकिन बीजेपी उनके राजनीतिक सफर की आखिरी पार्टी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया, “दल बदलने का सवाल ही नहीं है। मैं स्वाभिमान के साथ राजनीति में रहा हूँ और पदों के लिए लालच नहीं है।” 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा से अनुरोध किया था कि उन्हें कोई चुनावी सीट न दी जाए, क्योंकि वह अपने व्यवसाय पर ध्यान देना चाहते थे। नड्डा ने उन्हें राजनीति जारी रखने का आग्रह किया।
राजनीतिक जीवन की चुनौतियां और बेटों की तारीफ
राणे ने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन में कई बाधाएं और साजिशें आईं, लेकिन वे हमेशा जनता के लिए काम करते रहे। उन्होंने अपने बेटों की उपलब्धियों की भी सराहना की और कहा कि उन्हें मेहनत करने और नाम कमाने की सलाह दी। उन्होंने संकेत दिया कि उनके अनुभव और राजनीतिक संघर्ष की कहानियां उनके जीवन की ऑटोबायोग्राफी में विस्तार से देखी जा सकती हैं।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.