OSM सिस्टम विवाद संसद तक पहुंचा, टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल

HIGHLIGHTS
- सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर चल रहा विवाद अब संसद तक पहुंच गया है।
- कक्षा 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत ने मंगलवार को संसद भवन एनेक्सी में आयोजित शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी स्थायी समिति के समक्ष पेश होकर इस प्रणाली और इससे जुड़े टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर अपनी बात रखी।
- समिति इस बैठक में सीबीएसई द्वारा 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में लागू OSM सिस्टम और छात्रों द्वारा उठाई गई पारदर्शिता एवं मूल्यांकन संबंधी चिंताओं की समीक्षा कर रही थी।
- टेंडर प्रक्रिया…
सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर चल रहा विवाद अब संसद तक पहुंच गया है। कक्षा 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत ने मंगलवार को संसद भवन एनेक्सी में आयोजित शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी स्थायी समिति के समक्ष पेश होकर इस प्रणाली और इससे जुड़े टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर अपनी बात रखी।
समिति इस बैठक में सीबीएसई द्वारा 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में लागू OSM सिस्टम और छात्रों द्वारा उठाई गई पारदर्शिता एवं मूल्यांकन संबंधी चिंताओं की समीक्षा कर रही थी।
टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर आरोप
बैठक से पहले सार्थक सिद्धांत ने दावा किया कि सीबीएसई के विभिन्न टेंडर दस्तावेजों का विश्लेषण करने पर कई असंगतियां सामने आई हैं। उनका कहना है कि इन बदलावों से किसी विशेष सेवा प्रदाता को लाभ मिलने की आशंका पैदा होती है।
उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने अध्ययन में करीब 15 अलग-अलग विसंगतियों को चिन्हित किया है, जिनमें से कुछ प्रमुख बिंदुओं को उन्होंने समिति के सामने विस्तार से प्रस्तुत किया।
नियमों में बदलाव पर सवाल
छात्र के अनुसार OSM प्रणाली से जुड़े नए टेंडर दस्तावेजों में कई अहम शर्तों में बदलाव किए गए हैं। उनका दावा है कि पहले के आरएफपी में खराब प्रदर्शन करने वाली कंपनियों को अयोग्य ठहराने से जुड़े प्रावधान मौजूद थे, जिन्हें बाद के संस्करणों में हटा दिया गया।
इसके अलावा ब्लैकलिस्टिंग, वित्तीय योग्यता, CMMI स्तर और परियोजना अनुभव से जुड़े मानकों में भी संशोधन किए जाने का आरोप लगाया गया है।
शोध और सहयोग का दावा
सार्थक सिद्धांत ने बताया कि इस पूरे मामले पर उनका अध्ययन एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी और कुछ खोजी पत्रकारों के सहयोग से किया गया है। उनका कहना है कि यह जांच शिक्षा प्रणाली और सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता की जरूरत को उजागर करती है।
OSM सिस्टम पर रुख स्पष्ट
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के पूरी तरह विरोधी नहीं हैं। उनके अनुसार यह एक सकारात्मक कदम हो सकता है, लेकिन इसे लागू करने से पहले पर्याप्त परीक्षण और पायलट प्रोजेक्ट जरूरी थे।
सार्थक ने कहा, “OSM एक अच्छा सुधार है, लेकिन इसे लागू करने से पहले बड़े स्तर पर ट्रायल और पायलट स्टडी होनी चाहिए थी।”
अन्य मुद्दों पर भी चर्चा
सूत्रों के मुताबिक संसदीय समिति इस बैठक में कक्षा 9वीं और 10वीं के तीन-भाषा फॉर्मूले समेत शिक्षा से जुड़े अन्य पहलुओं की भी समीक्षा कर रही है और विभिन्न हितधारकों से सुझाव एकत्र कर रही है।
इस पूरे मामले के बाद अब निगाहें संसद की स्थायी समिति की आने वाली रिपोर्ट और सिफारिशों पर टिकी हुई हैं।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.
























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.