69000 सहायक शिक्षक भर्ती: अनारक्षित वर्ग ने हाई कोर्ट के फैसले का किया विरोध

HIGHLIGHTS
- राज्य सरकार ने 9500 लोगों को समायोजित करने की क्षमता बताई थी
- 4946 उम्मीदवारों की सूची को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं
- आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप अर्जियां दाखिल की हैं
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले से जुड़ी लंबित अपीलों पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर सुनवाई शुरू हुई।
अनारक्षित वर्ग की ओर से इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ के फैसले का विरोध किया गया। पक्षकारों ने छह साल से जारी अपनी नौकरी का हवाला देते हुए कहा कि यदि हाई कोर्ट के आदेश को लागू किया जाता है तो उन्हें नौकरी से बाहर होना पड़ेगा।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में चयन सूची को रद्द कर दिया था। साथ ही राज्य सरकार को मूल चयन सूची में आरक्षण के सभी नियमों को ध्यान में रखते हुए तीन महीने के भीतर नए सिरे से चयन सूची तैयार करने का निर्देश दिया था।
वहीं, आरक्षण नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने भी सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप अर्जियां दाखिल कर रखी हैं। मामले में बहस बुधवार को भी जारी रहेगी।
69000 सहायक शिक्षकों की नौकरी का मामला
सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं लंबित हैं, जिनमें अनारक्षित वर्ग ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के आदेश को चुनौती दी है। मंगलवार को न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी और एनवी अंजारिया की पीठ ने मामले से जुड़ी अपीलों पर नए सिरे से सुनवाई शुरू की।
सुनवाई की शुरुआत में पक्षकारों ने कोर्ट को बताया कि इससे पहले मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने पक्षकारों की सहमति के बाद राज्य सरकार से सुझाव मांगा था। इसमें पूछा गया था कि क्या नौकरी कर रहे लोगों को हटाए बिना प्रदेश सरकार आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नौकरी में समायोजित कर सकती है।
9500 लोगों का क्या होगा?
कोर्ट ने संकेत दिया था कि यदि ऐसा संभव है तो संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए आदेश पारित किया जा सकता है।
कोर्ट के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की थी। इसमें सरकार ने कहा था कि वह 9500 लोगों को समायोजित कर सकती है।
राज्य सरकार ने इसके साथ एक सूची भी पेश की थी, जिसमें 4946 ऐसे उम्मीदवार शामिल थे जो चयन की मेरिट सूची में थे और जिन्होंने पहले नियुक्ति का विकल्प नहीं चुना था।
उस समय कुछ पक्षकारों और आरक्षित वर्ग की ओर से इन 4946 लोगों को चयन सूची में शामिल किए जाने पर सवाल उठाया गया था। उनका कहना था कि इससे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के नौकरी पाने के अवसर कम हो रहे हैं। मंगलवार को सुनवाई के दौरान यह मुद्दा एक बार फिर सामने आया।
सुप्रीम कोर्ट में नए सिरे से सुनवाई
पीठ ने कहा कि मामले की नए सिरे से सुनवाई की जाएगी और सभी पक्षों को अपनी दलील रखने का अवसर दिया जाएगा। मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को लगातार तीन दिन मामले की सुनवाई होगी।
सुनवाई के दौरान बीएड योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों को योग्य माने जाने के मुद्दे पर भी बहस हुई। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से जुड़ा मुद्दा भी सुनवाई के दौरान उठाया गया।
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