लद्दाख में हाई कोर्ट की नियमित पीठ का रास्ता साफ, राष्ट्रपति मुर्मू ने दी मंजूरी

HIGHLIGHTS
- राष्ट्रपति ने लद्दाख में हाई कोर्ट बेंच से जुड़े 2026 के विनियमन को मंजूरी दी
- लद्दाख के वादकारियों को जम्मू या श्रीनगर जाने से राहत मिलेगी
- मुख्य न्यायाधीश उपराज्यपाल की मंजूरी से पीठ का स्थान तय करेंगे
लद्दाख। लद्दाख के पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों और मुकदमों के पक्षकारों के लिए न्याय तक पहुंच अब पहले के मुकाबले आसान होने वाली है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख साझा हाई कोर्ट की नियमित पीठ के आयोजन का रास्ता साफ कर दिया है। गुरुवार को राष्ट्रपति की ओर से जारी नए नियम के बाद लद्दाख के वादकारियों को सुनवाई के लिए श्रीनगर या जम्मू जाने की परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है। इसे न्यायिक सुगमता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव माना जा रहा है। साथ ही, दूरदराज के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को कानूनी अधिकारों और न्याय तक पहुंच के लिहाज से भी इससे मदद मिलेगी।
राष्ट्रपति ने ‘द यूनियन टेरिटरी ऑफ लद्दाख (सिटिंग ऑफ बेंच ऑफ द हाई कोर्ट ऑफ जम्मू एंड कश्मीर, एंड लद्दाख इन लद्दाख) रेगुलेशन, 2026’ को मंजूरी दी है। यह विनियमन संविधान के अनुच्छेद 240 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 58(2) के तहत जारी किया गया है। इसके जरिए लद्दाख में साझा हाई कोर्ट की पीठ के लिए कानूनी व्यवस्था तैयार की गई है।
नए प्रावधान के तहत हाई कोर्ट के न्यायाधीश और खंडपीठ लद्दाख में किसी भी स्थान पर बैठ सकते हैं। इस स्थान का फैसला मुख्य न्यायाधीश, लद्दाख के उपराज्यपाल की मंजूरी के बाद करेंगे। हालांकि, हाई कोर्ट की मौजूदा प्रधान पीठ में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। मुख्य न्यायाधीश को यह अधिकार भी रहेगा कि लद्दाख से जुड़े किसी मामले की सुनवाई श्रीनगर या जम्मू में कराने का निर्देश दे सकें।
राष्ट्रपति ने किस सांविधानिक शक्ति का इस्तेमाल किया?
राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 240 के तहत मिली विशेष सांविधानिक शक्ति का इस्तेमाल किया है। इस अनुच्छेद के तहत राष्ट्रपति को कुछ केंद्रशासित प्रदेशों में शांति, प्रगति और सुशासन के लिए विनियमन बनाने का अधिकार प्राप्त है। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 और अनुच्छेद 240 मिलकर लद्दाख के संबंध में ऐसे विनियम बनाने का सांविधानिक और वैधानिक आधार देते हैं।
अनुच्छेद 240 के तहत इस शक्ति के इस्तेमाल के लिए संसद का अवकाश में होना जरूरी नहीं है। यह व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति द्वारा जारी किए जाने वाले अध्यादेश से अलग है।
विनियमन कब लागू होगा और क्या होगा असर?
यह विनियमन लद्दाख में न्याय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कानूनी ढांचा उपलब्ध कराएगा। कानूनी सूत्रों के अनुसार, अनुच्छेद 240 के तहत विनियमन जारी करने से पहले संसद को स्थगित करना आवश्यक नहीं है।
हालांकि, विनियमन किसी तय तारीख से प्रभावी होगा। इस तारीख को लद्दाख के केंद्रशासित प्रदेश के प्रशासक की ओर से आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना के जरिए तय किया जाएगा। इससे लद्दाख के लोगों को अपने मामलों की सुनवाई के लिए दूर-दराज के स्थानों पर जाने की परेशानी से राहत मिलेगी।
लद्दाख के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
लद्दाख एक दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्र है, जहां रहने वाले लोगों को न्यायिक मामलों के लिए जम्मू या श्रीनगर जाना पड़ता था। नए विनियमन के बाद हाई कोर्ट की पीठ स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेगी।
इससे न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। स्थानीय लोगों के लिए कानूनी सहायता हासिल करना भी आसान होगा। यह कदम केंद्र सरकार की ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ नीति के अनुरूप है और लद्दाख में सुशासन व विकास को बढ़ावा देने में सहायक होगा।
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