रात में आए, अब दिन में लौटने की गुहार: बॉर्डर पर बांग्लादेशियों की भीड़

कोलकत्ता के पास भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र में इन दिनों एक अलग ही स्थिति देखने को मिल रही है। उत्तर 24 परगना जिले में स्थित हकीमपुर सीमा चौकी पर बड़ी संख्या में ऐसे लोग पहुंच रहे हैं, जो खुद को बांग्लादेशी नागरिक बताते हुए स्वेच्छा से अपने देश लौटने की बात कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि ये लोग पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों के विभिन्न हिस्सों में लंबे समय से रह रहे थे और अब दस्तावेजों की जांच व पहचान से जुड़ी प्रक्रियाओं के चलते अपनी वास्तविक नागरिकता स्वीकार कर रहे हैं। सीमा पर पहुंचकर ये लोग अपने पास मौजूद बांग्लादेश से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत कर सुरक्षित रूप से वापस भेजे जाने की अपील कर रहे हैं।
इस समय हकीमपुर सीमा चौकी पर कई लोग अपने परिवारों के साथ मौजूद हैं, जिनमें पुरुष, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। ट्रेन और बसों के जरिए लोग अलग-अलग इलाकों से यहां पहुंच रहे हैं और माहौल में चिंता और असमंजस साफ देखा जा सकता है।
खुलना जिले के रहने वाले हारून शेख ने बताया कि वह 2020 में लॉकडाउन के दौरान एक एजेंट की मदद से परिवार सहित भारत आए थे और तब से कोलकाता के पास बिराटी क्षेत्र में रह रहे थे। उनके अनुसार, उन्होंने राजमिस्त्री का काम किया और परिवार का पालन-पोषण किया, लेकिन अब पहचान संबंधी प्रक्रिया के चलते वे वापस लौटने को मजबूर हैं।
इसी तरह मोहम्मद सोहेल गाजी ने बताया कि वह कुछ साल पहले अपने परिवार के साथ भारत आए थे और बशीरहाट इलाके में रहकर निर्माण कार्य से जुड़े थे। उनका कहना है कि हालिया परिस्थितियों और दस्तावेजी जांच के चलते उन्होंने स्वेच्छा से वापस जाने का निर्णय लिया है।
एक अन्य मामले में रोजाना बीबी, जो सातखीरा जिले की रहने वाली हैं, कोलकाता के मटियाबुर्ज इलाके में घरेलू काम करती थीं। पहचान सामने आने के बाद उन्हें काम से हटा दिया गया, जिसके बाद उन्होंने भी अपने देश लौटने की इच्छा जताई है।
हकीमपुर सीमा चौकी पर तैनात अधिकारियों के अनुसार, आने वाले लोगों की पहचान और दस्तावेजों की जांच के बाद उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत वापस भेजा जा रहा है। राज्य प्रशासन द्वारा इनका डेटा एकत्र कर डिजिटल पोर्टल पर दर्ज किया जा रहा है और तब तक इन्हें अस्थायी रूप से सुरक्षित केंद्रों में रखा जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों के दस्तावेज स्पष्ट होते हैं, उन्हें प्रक्रिया पूरी कर सीमा पार कराया जा रहा है, जबकि अन्य मामलों में उनके परिजनों से संपर्क कर आवश्यक प्रमाण जुटाने की कोशिश की जा रही है।
सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अधिकारियों के अनुसार, पूरी प्रक्रिया प्रशासनिक निर्देशों के तहत संचालित हो रही है और सीमा पर निगरानी भी कड़ी कर दी गई है ताकि किसी भी तरह की अवैध आवाजाही को रोका जा सके।
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