पीओजेके में इंटरनेट सेवा बहाल करने का आदेश, हाईकोर्ट ने पाकिस्तान सरकार को 10 दिन की मोहलत दी

HIGHLIGHTS
- 5 जून की रात करीब 11:30 बजे पूरे क्षेत्र में मोबाइल और इंटरनेट सेवा बंद की गई थी।
- पाकिस्तान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों की पहुंच पर भी रोक लगाई थी।
- अगस्त के अंत तक कुछ क्षेत्रों में सेवा बहाल होने के बावजूद रावलाकोट और सुधनोटी में प्रतिबंध जारी रहा।
नई दिल्ली। पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में संचार सेवा बंद किए जाने के मामले में पाकिस्तान को झटका लगा है। पीओजेके हाईकोर्ट ने सरकार को 10 दिन के भीतर इंटरनेट सेवा बहाल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार से इस मामले में जवाब भी तलब किया है। संचार सेवा बंद होने के बाद सेना और स्थानीय प्रशासन की बेचैनी बढ़ गई है।
पांच जून को जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के प्रस्तावित मार्च और धरने को देखते हुए पाकिस्तान ने जेएएसी को प्रतिबंधित कर दिया था। जेएएसी पीओजेके के लोगों की आवाज उठाने वाली संस्था के तौर पर बताई गई है। इसके बाद कार्यकर्ताओं को आतंकी बताते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई।
पांच जून की रात करीब 11:30 बजे पूरे क्षेत्र में मोबाइल और इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई। आंदोलन को रोकने के लिए रेंजर्स और फ्रंटियर कोर को भी तैनात किया गया। सरकार ने इसके लिए कानून व्यवस्था की स्थिति और संभावित हिंसा को आधार बताया था। मामले की सुनवाई के दौरान 10 सितंबर को अदालत ने सभी क्षेत्रों में संचार सेवा बहाल करने का निर्देश दिया।
मीडिया पर भी लगाया गया प्रतिबंध
संचार सेवा बंद करने के साथ पाकिस्तान सरकार ने मीडिया की पहुंच पर भी रोक लगा दी। अंतरराष्ट्रीय मीडिया को क्षेत्र में जाने से रोका गया और मानवाधिकार संगठनों को भी प्रभावित जिलों का दौरा करने की अनुमति नहीं दी गई।
आंदोलन की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर भी पाकिस्तान सरकार ने कार्रवाई की। मानवाधिकार कार्यकर्ता अहमद फरहाद को जून में ही हिरासत में ले लिया गया था।
रावलाकोट का अत्याचार छिपाने का आरोप
पीओजेके मामलों के जानकार जोरावर सिंह जम्वाल के मुताबिक, सवाल यह है कि अगर जून में सुरक्षा कारणों से इंटरनेट बंद किया गया था तो अगस्त के अंत तक मीरपुर, भिंबर, नीलम और हवेली जैसे क्षेत्रों में सेवा बहाल किए जाने के बावजूद रावलाकोट और सुधनोटी को इससे अलग क्यों रखा गया।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, रावलाकोट में पाकिस्तानी सेना ने बड़े पैमाने पर नरसंहार किया है। वहां की महिलाओं के अपहरण का भी दावा किया गया है। करीब 500 महिलाएं अब भी लापता बताई जा रही हैं। इन्हीं घटनाओं को छिपाने के लिए पाकिस्तान ने रावलाकोट में व्यापक प्रतिबंध लगाया, ऐसा आरोप लगाया गया है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.