मेरठ के शास्त्रीनगर में छह अवैध निर्माणों पर चला बुलडोजर, फूट-फूटकर रोए लोग

HIGHLIGHTS
- ध्वस्तीकरण की कार्रवाई सुबह सवा सात बजे शुरू की गई।
- कार्रवाई से पहले सुबह छह बजे रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई थी।
- ध्वस्त किए गए कॉम्प्लेक्स में करीब 35 दुकानें थीं।
मेरठ। शास्त्री नगर गुरुद्वारा रोड और सेंट्रल मार्केट में बुधवार को छह अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाया गया। ध्वस्त की गई संपत्तियों में सेक्टर-तीन के भवन संख्या 492, 498, 1314 और 697, सेक्टर-दो का भवन संख्या 12 और सेक्टर-छह का भवन संख्या 670 शामिल है। सील किए गए 44 भवनों में ये छह ऐसे भवन थे, जिनका नक्शा दाखिल ही नहीं किया गया था।
सेक्टर-2 में जब जेसीबी से कॉम्प्लेक्स को ध्वस्त किया जाने लगा तो शिवम और उनकी पत्नी भावुक होकर रोने लगे। अपनी दुकानों पर बुलडोजर चलता देखकर दोनों बिलखते रहे। दोनों के रोने का वीडियो सोशल मीडिया पर भी साझा किया गया, जिसके बाद लोगों ने अधिकारियों पर सवाल उठाए।
लोगों ने आवास एवं विकास परिषद के अधिकारियों को कार्रवाई के लिए जिम्मेदार बताते हुए उनकी संपत्तियों पर भी बुलडोजर चलाने की मांग की। लोगों का आरोप है कि अधिकारियों की शह पर निर्माण किए गए। उनका सवाल है कि जब बाजार बसाया जा रहा था, तब इसे क्यों नहीं रोका गया।
लोगों का कहना है कि पिछले 30-40 वर्षों से रात-दिन मेहनत और मशक्कत करके बाजार को बसाया गया, लेकिन अब यह पूरी तरह बर्बाद हो रहा है। वहीं अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
आवासीय और व्यावसायिक दोनों संपत्तियां
शास्त्रीनगर आवासीय योजना संख्या 7 में आवासीय और व्यावसायिक दोनों तरह की संपत्तियां रखी गई थीं। विभाग के लेआउट में 230 व्यावसायिक भूखंड शामिल थे। योजना में कुल 6379 संपत्तियां हैं, जिनमें 5409 का वास्तविक प्रयोग हो रहा है।
योजना के कॉमर्शियल प्लॉट में भी नियमों का उल्लंघन करते हुए सेटबैक छोड़े बिना शोरूम और कॉम्प्लेक्स बनाए गए।
सेक्टर-2 में सबसे ज्यादा भवन
स्कीम नंबर सात के तहत सेक्टर-2 में सबसे ज्यादा 1325 भवन हैं। इनमें 985 का वास्तविक उपयोग हो रहा है, जबकि 293 में परिवर्तित उपयोग किया जा रहा है। इसी सेक्टर में सबसे अधिक 47 व्यावसायिक प्लॉट हैं।
सेक्टर-3 में कुल 96 आवासीय संपत्तियों में 813 में वास्तविक उपयोग है, जबकि 132 परिवर्तित उपयोग में हैं और 15 व्यावसायिक प्लॉट हैं।
स्कीम नंबर सात के अंतर्गत सेक्टर-एक से 13 तक आते हैं। इनमें कुल 6379 आवासीय भवन हैं, जिनमें 5409 का वास्तविक प्रयोग हो रहा है, जबकि सभी सेक्टरों में 293 का परिवर्तित प्रयोग किया जा रहा है। मौजूदा समय में इनमें से अधिकांश को बंद किया जा चुका है।
छह सेक्टरों में 230 व्यावसायिक प्लॉट
व्यावसायिक प्लॉट के तहत योजना के सेक्टर-दो में 47, सेक्टर-तीन में 15, सेक्टर-छह में 48, सेक्टर-नौ में 7, सेक्टर-12 में 30 और सेक्टर-13 में 83 प्लॉट रखे गए थे। इस तरह कुल 230 व्यावसायिक प्लॉट थे।
ध्वस्त कॉम्प्लेक्स में सीलिंग से पहले होता था कारोबार
आवास एवं विकास परिषद ने 8 अप्रैल को ध्वस्त किए गए परिसरों में सील लगाई थी। 14 जुलाई को इनका सर्वे कराया गया। आवंटियों को अवैध निर्माण खुद हटाने के लिए 15 दिन का नोटिस दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद ध्वस्तीकरण नहीं किया गया।
इसके बाद बुधवार को इन परिसरों को ध्वस्त कर दिया गया। सीलिंग से पहले इन परिसरों में पाहवा गारमेंट्स, हंगेरिया भोजनालय, दवा दुकान, व्यायामशाला और जूतों का शोरूम संचालित हो रहे थे। गुरुद्वारा रोड पर ध्वस्त किए गए भवन में एम्पायर पैलेस बैंक्वेट हॉल भी शामिल था।
मलबा हटाने में जुटा निगम
शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान नगर निगम और मेरठ विकास प्राधिकरण की टीमें पूरे दिन सक्रिय रहीं। ध्वस्तीकरण का काम आवास विकास की ओर से किया गया। इसके बाद नगर निगम ने मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया।
दोनों विभागों की संयुक्त मौजूदगी के कारण क्षेत्र में दिनभर हलचल बनी रही। ध्वस्तीकरण के बाद काफी मात्रा में मलबा जमा हो गया था। लोगों को परेशानी न हो, इसके लिए निगम की टीम मलबा हटाने में जुटी रही।
अपर नगर आयुक्त लवी त्रिपाठी ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर नगर निगम की ओर से कार्रवाई की जा रही है।
शास्त्रीनगर में फिर चला बुलडोजर, छह अवैध कॉम्प्लेक्स ध्वस्त
मेरठ के शास्त्रीनगर गुरुद्वारा रोड और सेंट्रल मार्केट में सील किए गए 44 भवनों में से छह को बुधवार को भारी फोर्स की मौजूदगी में बुलडोजर से ध्वस्त किया गया। ये सभी आवासीय संपत्तियां थीं, जिन्हें बिना नक्शा स्वीकृत कराए बनाया गया था। ध्वस्त की गई छह संपत्तियों में एक बैंक्वेट हॉल समेत छह कॉम्प्लेक्स शामिल थे। इन कॉम्प्लेक्स में करीब 35 दुकानें थीं।
कार्रवाई के लिए सुबह छह बजे ही शास्त्रीनगर से जुड़े रास्तों पर बैरिकेडिंग कर उन्हें बंद कर दिया गया। इससे स्कूली बच्चों और नौकरीपेशा लोगों को बाहर निकलने में परेशानी हुई। बिजली आपूर्ति भी काट दी गई थी। सुबह सवा सात बजे से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई।
सुप्रीम कोर्ट में 21 सितंबर को होने वाली सुनवाई से पहले 14 जुलाई के ध्वस्तीकरण आदेश के अनुपालन में आवास एवं विकास परिषद की ओर से यह कार्रवाई की गई। सुबह से ही भारी फोर्स तैनात कर बुलडोजर लगाए गए थे।
छह संपत्तियों का नक्शा स्वीकृत नहीं
उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह ने बताया कि 44 संपत्तियों में से छह ऐसी हैं, जिनका नक्शा स्वीकृत नहीं है। ये सभी आवासीय संपत्तियां हैं। नक्शा स्वीकृत कराए बिना इनका अवैध निर्माण किया गया था। बुधवार को इन्हीं छह संपत्तियों को ध्वस्त किया गया।
उन्होंने बताया कि 21 सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई से पहले परिषद की ओर से कंप्लायंस रिपोर्ट दाखिल की जाएगी।
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