चांदी के भाव में रिकॉर्ड उछाल, बरेली के बाजारों में बढ़ी मांग

बरेली में इस त्योहारी सीजन में चांदी का बाजार अभूतपूर्व तेजी के दौर से गुजर रहा है। सोने की बढ़ती कीमतों के कारण उपभोक्ताओं का रुझान अब चांदी के गहनों और सजावटी वस्तुओं की ओर बढ़ गया है। बीते 24 घंटे में चांदी की कीमत में 13 हजार रुपये प्रति किलो से अधिक का उछाल दर्ज किया गया है, जिसने सराफा कारोबारियों को भी चौंका दिया है।
स्थानीय सराफा व्यापारियों का कहना है कि लगभग 45 साल बाद चांदी के भाव में इस तरह की तेजी देखने को मिल रही है। त्योहारी मांग के चलते बाजारों में चांदी की उपलब्धता घट गई है और कई जगह इसकी सप्लाई भी प्रभावित बताई जा रही है।
सराफा कारोबारी राघव कुमार अग्रवाल ने बताया कि वर्ष 1980 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने चांदी के निर्यात की अनुमति दी थी, तब कीमतों में इसी तरह का असामान्य उछाल देखा गया था। उस समय चांदी का भाव एक दिन में 1,000 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 8,000 रुपये तक पहुंच गया था। हालांकि, 20 दिन बाद आदेश रद्द होने पर कीमतें वापस गिर गई थीं। इस बार भी बाजार में मांग अधिक और आपूर्ति सीमित होने के कारण दरें लगातार चढ़ान पर हैं।
सेमीकंडक्टर उद्योग से भी बढ़ी मांग
बरेली सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल के अनुसार, देश में सेमीकंडक्टर निर्माण शुरू होने से औद्योगिक स्तर पर भी चांदी की खपत बढ़ी है। मोबाइल, सौर पैनल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में चांदी का उपयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब तक इन क्षेत्रों में इसके विकल्प नहीं मिलते, तब तक कीमतों में तेजी बनी रहेगी।
इतिहास में पहली बार सोने-चांदी में 43 हजार का अंतर
सराफा व्यापारी सुबोध अग्रवाल ने बताया कि शनिवार को सोना 10 ग्राम के लिए 1.27 लाख रुपये और चांदी 1 किलो के लिए 1.69 लाख रुपये पर पहुंच गई, जो अब तक का सबसे बड़ा अंतर है। सामान्यत: दोनों धातुओं की कीमतों में इतना अंतर कभी नहीं देखा गया।
25 वर्षों में 28 गुना बढ़ी कीमत
व्यापारी संजीव अग्रवाल ने बताया कि पिछले ढाई दशक में चांदी की कीमतों में 28 गुना तक बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2001 में जहां चांदी 7,500 रुपये प्रति किलो थी, वहीं अब यह 1.69 लाख रुपये के पार पहुंच चुकी है। इस साल जनवरी से अब तक इसमें 75 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
पिछले दस वर्षों में अक्तूबर के भाव (रुपये प्रति किलो)
2015 – ₹35,600
2016 – ₹45,000
2017 – ₹40,300
2018 – ₹38,800
2019 – ₹44,500
2020 – ₹59,400
2021 – ₹61,000
2022 – ₹57,500
2023 – ₹68,800
2024 – ₹91,000
2025 – ₹1,69,000
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