सोशल मीडिया कंपनियों को पालन करना होगा भारत का कानून: अश्विनी वैष्णव

देश में बच्चों पर सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के प्रभाव को लेकर सरकार सतर्क हो गई है। हाल ही में AI समिट 2026 के दौरान केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव से जब पूछा गया कि क्या भारत नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है, तो उन्होंने संकेत दिए कि इस पर गंभीर चर्चा चल रही है।
बच्चों के लिए सुरक्षित कंटेंट पर जोर
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार फिलहाल विभिन्न सोशल मीडिया कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है। खास तौर पर उम्र-आधारित एक्सेस कंट्रोल और डीपफेक सामग्री जैसी संवेदनशील तकनीकों को लेकर नियमों पर चर्चा हो रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि Digital Personal Data Protection Act (DPDP Act) में बच्चों की सुरक्षा से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य है कि नाबालिगों को केवल उनकी उम्र के अनुसार सुरक्षित और उपयुक्त कंटेंट ही दिखाई जाए।
हालांकि मंत्री ने सीधे सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध की घोषणा नहीं की, लेकिन उन्होंने साफ किया कि बच्चों की डिजिटल सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
कंपनियों को भारत के कानून का पालन करना होगा
आईटी मंत्री ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि भारत में काम करने वाली सभी डिजिटल कंपनियों को देश के कानून और संविधान का पालन करना अनिवार्य होगा। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि Meta, X, YouTube और Netflix जैसी कंपनियां भारत के नियमों और सुरक्षा मानकों से ऊपर नहीं हैं।
डीपफेक और नए नियम
डीपफेक तकनीक को गंभीर खतरा मानते हुए मंत्री ने कहा कि मौजूदा नियम पर्याप्त नहीं हैं। जरूरत पड़ने पर संसद में व्यापक सहमति लेकर कड़े कानून लाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस विषय पर एक संसदीय समिति पहले ही विस्तृत अध्ययन कर चुकी है। DPDP कानून में पहले से ही छात्रों और युवाओं के लिए कंटेंट कंट्रोल से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।
सरकार का उद्देश्य ऐसा सुरक्षित डिजिटल वातावरण तैयार करना है जिसमें तकनीक का लाभ तो मिले, लेकिन समाज को नुकसान न पहुंचे। आने वाले समय में सोशल मीडिया कंपनियों के साथ मिलकर नए नियामक उपायों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय उदाहरण
अश्विनी वैष्णव ने अंतरराष्ट्रीय उदाहरण भी साझा किए। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागू है, जबकि फ्रांस और यूके में पेरेंटल कंसेंट और उम्र सीमा को लेकर सख्त नियम बनाए गए हैं।
सरकार ने यह स्पष्ट किया कि कोई भी निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा। साफ है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर भारत में आने वाले समय में बड़े बदलाव देखे जा सकते हैं।





















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