सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल जारी रखने का किया ऐलान, बोले- युवाओं को सांसदों से मिलने की अनुमति मिले

HIGHLIGHTS
- सोनम वांगचुक ने सीजेपी के 'संसद चलो' मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के विरोध में अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया।
- उन्होंने कहा कि युवा नेताओं को सांसदों से मिलने की अनुमति मिलने या उन्हें अस्पताल में उनसे मिलने की इजाजत मिलने तक वह उपवास जारी रखेंगे।
- 21 दिनों के उपवास के बाद अस्पताल ले जाए गए वांगचुक ने सरकार से छात्रों की शिकायतों का समाधान करने की अपील की है।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोमवार को अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखने की घोषणा की है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 'संसद चलो' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई से नाराज होकर उन्होंने कहा कि वह अपना उपवास तब तक जारी रखेंगे, जब तक युवा नेताओं को सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं दी जाती या उन्हें खुद अस्पताल में उनसे मुलाकात की इजाजत नहीं मिलती।
हस्तलिखित नोट के जरिए दिया संदेश
सफदरजंग अस्पताल से जारी अपने हस्तलिखित बयान में वांगचुक ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ हुए व्यवहार को देखते हुए उन्होंने अपना उपवास जारी रखने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि जब तक युवा नेताओं को संसद भवन में सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं दी जाती या उन्हें अस्पताल में उनसे मिलने की इजाजत नहीं मिलती, तब तक वह अनशन जारी रखेंगे।
वांगचुक ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार इससे पहले शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करेगी।
'युवाओं ने उकसावे के बावजूद बनाए रखी शांति'
वांगचुक ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने कई परिस्थितियों के बावजूद जिस तरह शांति बनाए रखी, उससे वह प्रभावित हैं। उन्होंने सरकार और पुलिस से अपील करते हुए कहा कि छात्रों को संसद के सामने अपनी शिकायतें रखने का मौका देकर इस मामले का समाधान किया जाए।
उन्होंने विश्वास जताया कि युवा प्रदर्शनकारी आगे भी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखेंगे।
अस्पताल से जारी है आंदोलन
बताया जा रहा है कि 21 दिनों के उपवास के बाद 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल लेकर गई थी, जिसके बाद से वह वहीं भर्ती हैं। उनके समर्थकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें गैर-कानूनी हिरासत में रखा गया है, जबकि अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज किया है।
अनशन खत्म करने के लिए रखी थी शर्त
इससे पहले सोनम वांगचुक ने कहा था कि वह अपना उपवास तभी समाप्त करेंगे, जब सरकार शिक्षा व्यवस्था में कथित कमियों की जिम्मेदारी स्वीकार करेगी या राजनीतिक नेताओं की ओर से संसद के मानसून सत्र में इस मुद्दे को उठाने का आश्वासन मिलेगा।
हालांकि, 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुए घटनाक्रम के बाद उन्होंने अपनी भूख हड़ताल जारी रखने का फैसला किया।
सीजेपी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच, जिम्मेदारी तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है।
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