9 कबूतरों के साथ कांवड़ यात्रा पर निकले सोनीपत के अंकित, मुजफ्फरनगर में दिखा अनोखा नजारा

HIGHLIGHTS
- सोनीपत के गांव बलि उलाहना निवासी शिवभक्त अंकित लेकर पहुंचे अनोखी कांवड़।
- कांवड़ के दोनों ओर बनाए गए हैं डबल स्टोरी पिंजरे, जिनमें कबूतर यात्रा कर रहे हैं।
- अंकित ने बताया कि कबूतर उनके लिए परिवार के सदस्यों की तरह हैं।
मुजफ्फरनगर। सावन की कांवड़ यात्रा में इस बार आस्था के साथ अलग-अलग संदेश देने वाली कांवड़ भी लोगों का ध्यान खींच रही हैं। कोई कांवड़ में धार्मिक झांकियां सजा रहा है तो कोई पर्यावरण, संस्कृति और सामाजिक संदेश से जुड़ी कांवड़ लेकर चल रहा है।
इसी क्रम में हरियाणा के सोनीपत जिले से आए एक शिवभक्त की अनोखी कांवड़ शुक्रवार सुबह मुजफ्फरनगर में चर्चा का विषय बन गई। इस कांवड़ की खासियत यह है कि इसमें बाबा अमरनाथ के अमर कबूतरों की थीम को दर्शाया गया है और इसके साथ 9 पालतू कबूतर भी यात्रा कर रहे हैं।
सोनीपत के गांव बलि उलाहना निवासी शिवभक्त अंकित शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे अपनी इस विशेष कांवड़ के साथ मुजफ्फरनगर पहुंचे। कांवड़ के दोनों ओर डबल स्टोरी पिंजरे बनाए गए हैं, जिनमें कबूतरों को सुरक्षित रखा गया है।
जैसे ही यह कांवड़ शहर के शिव चौक पहुंची, श्रद्धालु इसे देखने के लिए रुक गए। लोगों ने अनोखी कांवड़ की तस्वीरें और वीडियो अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किए। कबूतरों के साथ यात्रा करती इस कांवड़ को लेकर श्रद्धालुओं में उत्सुकता दिखाई दी।
डबल स्टोरी पिंजरों में सुरक्षित हैं 9 कबूतर
शिवभक्त अंकित ने बताया कि उन्होंने अपनी कांवड़ को विशेष तरीके से तैयार कराया है। कांवड़ के दोनों तरफ डबल स्टोरी पिंजरे बनाए गए हैं, जिनमें उनके पालतू कबूतर रखे गए हैं।
उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान कबूतरों को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए उनके खाने-पीने और देखभाल की पूरी व्यवस्था साथ रखी गई है। जहां भी यात्रा के दौरान पड़ाव होता है, वहां सबसे पहले कबूतरों की देखभाल की जाती है।
अंकित ने कहा कि ये कबूतर उनके लिए सिर्फ पक्षी नहीं बल्कि परिवार के सदस्य हैं।
'खुद भूखा रह सकता हूं, लेकिन कबूतरों को नहीं रख सकता'
अंकित ने बताया कि उन्हें बचपन से ही कबूतर पालने का शौक है। उन्होंने कहा, "कबूतरों में ही मेरी जान बसती है। मैं खुद भूखा रह सकता हूं, लेकिन अपने कबूतरों को कभी भूखा नहीं रख सकता। ये मेरे परिवार का हिस्सा हैं।"
उन्होंने बताया कि वह अपने कबूतरों को बादाम समेत पौष्टिक आहार देते हैं और नियमित रूप से उनकी देखभाल करते हैं। उन्होंने कहा कि कबूतरों की सुरक्षा के लिए वह हर संभव प्रयास करते हैं।
अंकित के अनुसार, हरिद्वार से गंगाजल लेने के समय उन्होंने दो कबूतरों को मुक्त कर दिया था। अब जलाभिषेक के बाद 11 अगस्त को मंदिर परिसर में बाकी कबूतरों को भी आजाद कर देंगे। उन्होंने बताया कि सभी कबूतर पूरी तरह पालतू हैं और लंबे समय से उनके साथ हैं।
कबूतरबाजी प्रतिबंध पर जताई राय
अंकित ने हरियाणा में कबूतरबाजी पर लगाए गए प्रतिबंध का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कबूतर पालना सिर्फ शौक नहीं बल्कि जिम्मेदारी भी है।
उन्होंने कहा, "जिस तरह एक मां अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है, उसी तरह कबूतर पालने वाले भी अपने पक्षियों की देखभाल करते हैं। प्रतिबंध लगाने से पहले इस पहलू पर भी विचार होना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि कबूतर पालने वाले लोग अपने पक्षियों को परिवार की तरह रखते हैं और उनकी हर जरूरत का ध्यान रखते हैं।
6 लोगों की टोली कर रही कांवड़ यात्रा
अंकित ने बताया कि उनकी छह लोगों की टोली कांवड़ यात्रा पर निकली है। कांवड़ को वह और उनके बड़े भाई नवीन बारी-बारी से उठाते हैं, जबकि अन्य साथी यात्रा में सहयोग करते हैं।
उन्होंने बताया कि उनकी टोली हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रही है। इस अनोखी कांवड़ के जरिए उनका उद्देश्य भगवान शिव के प्रति श्रद्धा के साथ-साथ जीवों के प्रति प्रेम का संदेश देना भी है।
मुजफ्फरनगर में इस अनोखी कांवड़ को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। कबूतरों के साथ निकली यह कांवड़ यात्रा आस्था और पशु प्रेम के अनूठे संगम के रूप में नजर आई।
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