मंदिरों की कमाई जन कल्याण पर हो खर्च: मोहन भागवत

लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि मंदिरों से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा सीधे जन कल्याण के कामों में लगना चाहिए। यह बयान उन्होंने आरएसएस के शताब्दी वर्ष समारोह के अवसर पर लखनऊ में दो दिवसीय प्रवास के अंतिम दिन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित जन गोष्ठी में दिया।
इस मौके पर उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के प्रबुद्धजनों के सवालों का जवाब भी दिया। ललिता प्रसाद मिश्र के सवाल पर डॉ. भागवत ने कहा कि संघ की सबसे बड़ी चुनौती हिंदू समाज को जागरूक करना है, क्योंकि इसे जगाने में लगातार मेहनत करनी पड़ती है।
डॉ. श्वेता श्रीवास्तव और कर्नल एमके सिंह के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि मंदिरों की कमाई का उपयोग केवल जन कल्याण के लिए होना चाहिए। इस प्रक्रिया की देखरेख सरकार के बजाय जिम्मेदार और भरोसेमंद भक्तों के हाथ में होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देश के प्रमुख मंदिरों की आय और संचालन की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष संस्थाओं के नियंत्रण में होनी चाहिए, और संघ इस दिशा में तैयारी कर रहा है।
'सरकार पर हमारा नियंत्रण नहीं'
जन गोष्ठी में दीनानाथ श्रीवास्तव ने सवाल किया कि क्या सच में भाजपा सरकार को संघ ही चला रहा है। इस पर डॉ. भागवत ने स्पष्ट किया कि यह एक भ्रांति है। उन्होंने कहा, "हमारे पास सरकार पर कोई रिमोट कंट्रोल नहीं है। सरकार चलाना बहुत चुनौतीपूर्ण कार्य है, हम सिर्फ अपने कार्यों पर ध्यान देते हैं। हां, सुझाव दे सकते हैं, लेकिन निर्णय सत्ता में बैठे लोगों का है।"
दिलीप कुमार के सवाल पर कि भाजपा की सरकार बनते ही कुछ अवसरवादी लोग संघ में शामिल हो जाते हैं और समर्पित कार्यकर्ता प्रभावित होते हैं, डॉ. भागवत ने कहा कि ऐसे लोगों को अपने समर्पण की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ की कार्यप्रणाली मजबूत है और अवसरवादी लंबे समय तक संघ में टिक नहीं पाते, क्योंकि संघ से उन्हें कोई निजी लाभ नहीं मिलता।
डॉ. भागवत ने अंत में जोर दिया कि संघ केवल समर्पित कार्यकर्ताओं से प्रेरणा और योगदान लेता है और संगठन का उद्देश्य देश और समाज का उत्थान है, किसी व्यक्तिगत लाभ का साधन नहीं।
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