हाईकोर्ट स्टे के चलते राज्य कर विभाग में 65 कर अधिकारियों की तैनाती रुकी

उत्तर प्रदेश के राज्य कर विभाग में करीब 65 अधिकारी ऐसे हैं, जिन्हें महीनों से न तो फील्ड में भेजा जा सका है और न ही कोई विभागीय जिम्मेदारी दी गई है, जबकि उन्हें नियमित वेतन मिल रहा है। इसका कारण हाईकोर्ट से मिले स्टे ऑर्डर हैं, जिनका पालन तो किया जा रहा है, लेकिन उसके बाद की प्रशासनिक कार्रवाई ठप पड़ गई है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों को या तो निलंबित किया गया था, बिना ठोस कारण ट्रांसफर किया गया था, या उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू हुई थी। कई अधिकारियों ने इन आदेशों के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया और वहां से राहत के रूप में स्टे ऑर्डर हासिल किया। इसके बाद तकनीकी रूप से कार्रवाई रुकी, लेकिन विभाग उन्हें पुनः जिम्मेदारी सौंपने की स्थिति में नहीं है।
स्थिति यह है कि कानपुर, लखनऊ, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ, मथुरा जैसे बड़े कर परिक्षेत्रों में जहां पहले ही अधिकारियों की कमी है, वहीं दर्जनों अनुभवी अधिकारी घर बैठे हैं। इससे जांच, राजस्व वसूली और प्रवर्तन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों पर असर पड़ रहा है। सरकार राजस्व बढ़ाने पर जोर दे रही है, लेकिन अनुभवी अधिकारियों की सेवाएं उपयोग में नहीं आ रही हैं।
कोर्ट की शरण में अधिकारी, प्रशासनिक जटिलता बढ़ी
राज्य कर विभाग ने पिछली कुछ वर्षों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। कई अधिकारियों को निलंबित किया गया, चार्जशीट जारी की गई और जांच के आदेश दिए गए। हालांकि, अधिकतर अधिकारी हाईकोर्ट पहुंचे और वहां से राहत मिलने के बाद प्रशासनिक प्रक्रिया जमी हुई है।
राज्य कर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेशों का पूरा पालन किया जा रहा है। जिन मामलों में स्टे ऑर्डर मिला है, वहां कानून के दायरे में रहकर ही आगे की कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में विभाग ने पुनः हाईकोर्ट में अपील की है और जिन मामलों में आदेश स्पष्ट हैं, वहां तैनाती की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
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