सर्दियों में गर्म, गर्मियों में ठंडी: एएमयू की नई ग्रीन ईंट से निर्माण क्रांति

अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) ने निर्माण जगत में क्रांति लाने वाली एक नई ईंट विकसित की है। यह ईको-फ्रेंडली ईंट गोबर, राख और चूने के मिश्रण से बनी है और इसकी लागत महज चार रुपये प्रति ईंट है। सामान्य ईंट की कीमत लगभग आठ रुपये होती है।
इस हल्की ईंट का वजन केवल 900 ग्राम है, जो पारंपरिक ईंट से लगभग 60% कम है। विशेष डिजाइन और सामग्री के कारण यह कमरे को सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडा रखने में मदद करती है। इस कारण इसे पेटेंट भी मिल चुका है और जल्द ही उत्पादन के लिए कंपनियों के साथ समझौते की संभावना है।
एएमयू के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. मेहमूद अनवर ने बताया कि हल्की होने के कारण यह ईंट भवन के पिलर और ढांचे पर दबाव कम करती है। पारंपरिक ईंटों के विपरीत, इसे आग में नहीं पकाना पड़ता; सांचा बनाकर प्राकृतिक धूप और हवा में सुखाया जाता है, जिससे धुआं नहीं निकलता और मिट्टी की बर्बादी भी कम होती है। ईंट बनाने में 25% गोबर, 60% फ्लाई ऐश, 5% चूना और 10% मिट्टी का मिश्रण इस्तेमाल किया गया है, जो मजबूती और टिकाऊपन सुनिश्चित करता है।
प्रो. अनवर के अनुसार यह ईंट ऊष्मा रोधी (थर्मल इंसुलेटिव) है। प्रयोगशाला परीक्षण में इसकी संपीडन शक्ति (कंप्रेसिव स्ट्रेंथ) लगभग 16.5 एमपीए पाई गई, जो पारंपरिक ईंटों के बराबर या बेहतर है। जल अवशोषण दर भी मानक के अनुरूप 12.7% से 17.2% के बीच रही।
इस तकनीक का पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों पर सकारात्मक प्रभाव है। औद्योगिक अपशिष्ट (फ्लाई ऐश) और कृषि अवशेष (गोबर) का उपयोग होने से प्रदूषण कम होगा और मिट्टी की खोदाई घटेगी। प्रो. अनवर का कहना है कि यदि सरकार इस तकनीक को प्रोत्साहित करे तो यह ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ते आवास निर्माण और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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