मुजफ्फरनगर में EOC कंट्रोल रूम की ड्यूटी से 10 कर्मचारी गैरहाजिर, प्रशासन ने मांगा जवाब

HIGHLIGHTS
- कर्मचारियों की ड्यूटी जिले के विभिन्न विभागों और शैक्षणिक संस्थानों से लगाई गई थी।
- प्रशासन के अनुसार, संबंधित कर्मचारियों को फोन, व्हाट्सएप और कार्यालय के माध्यम से सूचना दी गई थी।
- अनुपस्थित कर्मचारियों में जल निगम, लोक निर्माण विभाग और गंग नहर के कर्मी भी शामिल हैं।
मुजफ्फरनगर में कलेक्ट्रेट स्थित इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (EOC) के कंट्रोल रूम में ड्यूटी से गैरहाजिर रहने वाले 10 कर्मचारियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। एडीएम वित्त एवं राजस्व गंभीर सिंह ने सोमवार शाम करीब 7 बजे संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण लेने और विभागीय जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित विभागों को स्पष्ट संस्तुति के साथ तीन दिन के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है।
फोन और व्हाट्सएप के जरिए दी गई थी ड्यूटी की सूचना
डीएम कार्यालय के आदेश के तहत जिले के विभिन्न विभागों और शैक्षणिक संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों की EOC कंट्रोल रूम में शिफ्ट के अनुसार ड्यूटी लगाई गई थी। प्रशासन के पत्र के मुताबिक, कर्मचारियों को फोन, व्हाट्सएप और कार्यालय के माध्यम से ड्यूटी की जानकारी दी गई थी। इसके बावजूद निर्धारित तिथियों पर 10 कर्मचारियों के अनुपस्थित रहने का मामला सामने आया।
प्रशासन ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित विभागों से जवाब मांगा है। साथ ही कर्मचारियों के अनुपस्थित रहने के कारणों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
अनुपस्थित कर्मचारियों की सूची में ये नाम शामिल
ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए कर्मचारियों में जनता इंटर कॉलेज, कुटेसरा के लिपिक प्रशांत शर्मा, गंग नहर के कनिष्ठ सहायक रवि कुमार, एसडी डिग्री कॉलेज के लिपिक रविंद्र सिंह, जल निगम के वरिष्ठ सहायक अंकुर जैन और जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी कार्यालय के सहायक लेखाकार विजय वर्मा शामिल हैं।
इसके अलावा गंग नहर के अवर अभियंता विवेक चौधरी, लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के वरिष्ठ सहायक अतुलेश चंद्र शर्मा, एसडी इंटर कॉलेज, मीरापुर के कनिष्ठ सहायक रणजीत सिंह, जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय के गन्ना पर्यवेक्षक ललित कुमार और एसडी डिग्री कॉलेज, मुजफ्फरनगर के लिपिक नीतीश गोयल के नाम भी सूची में शामिल हैं।
तीन दिन के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश
एडीएम गंभीर सिंह ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे कर्मचारियों से स्पष्टीकरण लें और विभागीय जांच पूरी करने के बाद स्पष्ट संस्तुति के साथ तीन दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपें। विभागों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
होम्योपैथिक और एलोपैथिक लाइसेंस को लेकर अधिकारी का बयान
वहीं, होम्योपैथिक अधिकारी अक्षय कात्यान ने कहा कि मेडिकल स्टोर संचालक होम्योपैथिक और एलोपैथिक दोनों लाइसेंस एक साथ चलाना चाहता है, जो नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि वायरल हो रहे वीडियो के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
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