मुजफ्फरनगर में अवैध मिट्टी खनन का आरोप, वायरल VIDEO ने उठाए प्रशासन पर सवाल

HIGHLIGHTS
- मुजफ्फरनगर के जौली रोड और सिल्लाजुड़ी क्षेत्र में कथित अवैध मिट्टी खनन के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठे हैं।
- 16 और 18 जुलाई के वीडियो में मिट्टी से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सड़कों पर दौड़ती नजर आ रही हैं, स्थानीय लोगों ने लंबे समय से खनन जारी रहने का आरोप लगाया है।
- नागरिकों ने अवैध खनन की जांच, ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर रोक और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मुजफ्फरनगर: जिले में अवैध मिट्टी खनन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। जौली रोड और शहर से सटे सिल्लाजुड़ी क्षेत्र से सामने आए नए वीडियो प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल 16 और 18 जुलाई के वीडियो में मिट्टी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खुलेआम सड़कों पर दौड़ती नजर आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह अवैध कारोबार लंबे समय से जारी है, लेकिन संबंधित विभाग अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पाए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार जौली रोड पर दिन और रात मिट्टी से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही बनी रहती है, जिससे राहगीरों और आसपास के निवासियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ओवरलोड और तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉलियां कई बार हादसों का कारण भी बन चुकी हैं, इसके बावजूद उनका संचालन लगातार जारी है।
आरोप है कि जौली रोड और सिल्लाजुड़ी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मिट्टी की खुदाई कर अवैध खनन किया जा रहा है। इसके बाद ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए बिना किसी रोक-टोक के मिट्टी को शहर के अलग-अलग इलाकों तक पहुंचाया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस कारोबार से जुड़े लोगों में कार्रवाई का कोई डर दिखाई नहीं देता।
16 और 18 जुलाई की सुबह करीब नौ बजे रिकॉर्ड किए गए वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद एक बार फिर खनन विभाग और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि लगातार वीडियो सामने आने के बावजूद यदि अवैध खनन का सिलसिला जारी है, तो कार्रवाई की प्रभावशीलता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
स्थानीय नागरिक साजिद, मनोज और अन्य लोगों ने जौली रोड तथा सिल्लाजुड़ी क्षेत्र में चल रहे कथित अवैध खनन की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के संचालन पर रोक लगाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की है, ताकि भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं की आशंका को कम किया जा सके।
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