बेगूसराय: टूटे पैर पर प्लास्टर नहीं, कार्टन बांधकर मरीज को किया रेफर; वीडियो वायरल

HIGHLIGHTS
- वीडियो में सड़क दुर्घटना में घायल युवक के पैर को कार्टन से बांधकर रेफर करते हुए दिखाया गया है।
- घायल युवक कृष्ण कुमार को डायल-112 की पुलिस अस्पताल लेकर पहुंची थी।
- डॉक्टरों ने पैर में गंभीर चोट और फ्रैक्चर की आशंका जताई थी।
बेगूसराय के अनुमंडलीय अस्पताल मंझौल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में सड़क हादसे में घायल एक युवक के टूटे पैर को कार्टन से बांधकर बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल बेगूसराय रेफर किए जाने का दृश्य दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और उपलब्ध सुविधाओं को लेकर लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है।
प्लास्टर की जगह कार्टन से बांधा पैर
जानकारी के मुताबिक, नावकोठी थाना क्षेत्र के महेशवारा वार्ड-4 निवासी सदन मोहन प्रसाद सिन्हा के पुत्र कृष्ण कुमार 15 जुलाई की रात गढ़पुरा से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान मंझौल थाना क्षेत्र के हरसाइन पुल के पास टेंपो की टक्कर से वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
डायल-112 की पुलिस घायल कृष्ण कुमार को इलाज के लिए अनुमंडलीय अस्पताल मंझौल लेकर पहुंची। जांच के दौरान डॉक्टरों ने पैर में गंभीर चोट और फ्रैक्चर की आशंका जताई। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल बेगूसराय रेफर कर दिया गया।
रेफर किए जाने के दौरान मरीज के पैर को स्थिर रखने के लिए कार्टन का इस्तेमाल कर उसे बांधा गया। इसी दौरान किसी व्यक्ति ने इसका वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोगों ने अस्पताल में संसाधनों की कमी को लेकर सवाल उठाए, जबकि चिकित्सकीय जानकारों का कहना है कि मरीज के पैर को अस्थायी रूप से स्थिर रखने के लिए ऐसी व्यवस्था की जाती है।
अस्पताल में मानव संसाधन की कमी
अस्पताल प्रबंधक गौरी शंकर ने बताया कि अस्पताल में आर्थोपेडिक विभाग में केवल एक चिकित्सक कार्यरत हैं। इसके अलावा ड्रेसर, ओटी असिस्टेंट, वार्ड ब्वॉय और फोर्थ ग्रेड कर्मियों समेत करीब 70 प्रतिशत मानव संसाधन की कमी है।
उन्होंने कहा कि मरीज को चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुसार कार्टन से पैर को स्थिर कर रेफर किया गया था।
30 प्रतिशत कर्मचारियों के सहारे चल रहा अस्पताल
अस्पताल प्रभारी चिकित्सक ने बताया कि वायरल हो रहा वीडियो 15 जुलाई की रात का है, जिसे अब सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मरीज की स्थिति और उपलब्ध संसाधनों को देखते हुए यह कदम उठाया गया था।
उन्होंने बताया कि अस्पताल फिलहाल केवल 30 प्रतिशत कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रहा है। साथ ही फ्रैक्चर स्प्लिंट की आपूर्ति भी नहीं हो रही है।
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