बिहार में 75% आरक्षण पर फिर गरमाई सियासत, तेजस्वी यादव ने NDA से की बड़ी मांग

HIGHLIGHTS
- उन्होंने सुरक्षित सीटों से इस्तीफा देकर सामान्य सीट पर चुनाव लड़ने की चुनौती दी।
- नेता प्रतिपक्ष ने बिहार में पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
- उन्होंने पातेपुर के पत्रकार कुंदन कुमार के कथित उत्पीड़न का मामला भी उठाया।
पटना। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने बिहार में आरक्षण और पुलिस कार्रवाई को लेकर एनडीए सरकार पर निशाना साधा। मंगलवार को पोलो रोड स्थित अपने आवास पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में तेजस्वी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा से मांग की कि बिहार में बढ़ाए गए 75 प्रतिशत आरक्षण को नौवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जाए।
तेजस्वी ने कहा कि बिहार में महागठबंधन सरकार ने जातीय गणना कराने के बाद पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित और आदिवासी वर्ग के आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 65 प्रतिशत की थी। इसके साथ ईडब्ल्यूएस के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण मिलाकर कुल 75 प्रतिशत आरक्षण को नौवीं अनुसूची में शामिल कराने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था। उन्होंने कहा कि एनडीए नेताओं ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार पर दबाव नहीं बनाया, जिसके कारण बढ़ी हुई आरक्षण सीमा वापस हो गई।
उन्होंने इसके लिए जीतन राम मांझी, चिराग पासवान, नीतीश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा और भाजपा को जिम्मेदार बताया। तेजस्वी ने कहा कि उन्होंने लगातार मांग की है कि बढ़े हुए आरक्षण को 75 प्रतिशत से आगे बढ़ाकर 85 प्रतिशत किया जाए और इसे नौवीं अनुसूची में शामिल किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नेताओं की मंशा सही नहीं है और आरक्षण का फायदा उठाकर अपने परिवार की राजनीति को मजबूत किया जा रहा है।
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस को खुश रखने के लिए आरक्षण की समीक्षा की बात शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि जीतन राम मांझी और चिराग पासवान नागपुर की स्क्रिप्ट पर बातें कर रहे हैं और दोनों मिलकर कहीं न कहीं दलित समाज के साथ अन्याय कर रहे हैं।
सुरक्षित सीटों से इस्तीफा देकर सामान्य सीट पर चुनाव लड़ने की चुनौती
तेजस्वी यादव ने चिराग पासवान, जीतन राम मांझी, रामदास आठवले और ओम प्रकाश राजभर से आरक्षण और दलित समाज के प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल किए। उन्होंने कहा कि यदि ये नेता आरक्षण के मुद्दे को लेकर इतने गंभीर हैं तो सुरक्षित सीटों से इस्तीफा देकर सामान्य सीट से चुनाव लड़कर दिखाएं।
उन्होंने न्यायपालिका, विश्वविद्यालयों और केंद्र सरकार में दलित प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि इन क्षेत्रों में दलित समाज की भागीदारी बेहद कम है।
बिहार में पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर आरोप
तेजस्वी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सरकार पर पुलिस कार्रवाई को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में युवा, छात्र, पत्रकार और आम लोगों पर पुलिस के जरिए जुल्म किया जा रहा है।
उन्होंने आंदोलनकारियों पर गोली चलाने, फर्जी एनकाउंटर और पत्रकारों पर दबाव बनाने जैसी घटनाओं को लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं बताया। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि सवाल पूछने वालों पर फर्जी मुकदमे दर्ज करने और उनके परिवार को प्रताड़ित करने की नीति अपनाई जा रही है। उनके मुताबिक, इससे बिहार में डर का माहौल बना है और लोगों का पुलिस तथा सरकार से विश्वास उठ गया है।
पातेपुर के पत्रकार कुंदन कुमार का मामला उठाया
तेजस्वी ने वैशाली जिले के पातेपुर के यूट्यूब चैनल से जुड़े पत्रकार कुंदन कुमार के कथित पुलिस उत्पीड़न का मामला भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि 29 अगस्त को कुंदन कुमार को पुलिस ने प्रताड़ित किया और उनके खिलाफ कट्टा रखकर फंसाने की साजिश की गई।
तेजस्वी के मुताबिक, पत्रकार ने पातेपुर क्षेत्र में विकास और सड़क से जुड़े मुद्दे उठाए थे, जो कथित तौर पर स्थानीय मंत्री को पसंद नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद थाने पर दबाव डालकर पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई की गई।
तेजस्वी ने कहा कि कुंदन कुमार को न्यायालय से जमानत मिल गई। इसके बाद बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के मामले में भी उनके और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
डीएसपी और दो थाना प्रभारियों पर कार्रवाई की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने मामले में संबंधित डीएसपी और दोनों थाना प्रभारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो राजद सड़क पर उतरेगा और वैशाली बंद कराने का काम किया जाएगा।
तेजस्वी ने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकारिता को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सवाल पूछने वाले पत्रकारों और आम लोगों को दबाने की कोशिश कर रही है।
पत्रकार कुंदन कुमार ने बताई अपनी आपबीती
संवाददाता सम्मेलन में पत्रकार कुंदन कुमार भी मौजूद रहे। उन्होंने अपने साथ हुई कथित मारपीट और पुलिस प्रताड़ना की जानकारी दी।
कुंदन कुमार ने आरोप लगाया कि उन्हें 50 से अधिक लाठियों से पीटा गया और बाद में जबरन कट्टा रखकर फंसाने की कोशिश की गई। उन्होंने पत्रकारों को अपनी पिटाई से संबंधित साक्ष्य भी दिखाए।
कुंदन कुमार ने कहा कि न्यायालय से उन्हें राहत मिली और जमानत मिल गई। उन्होंने अपने साथ हुई कार्रवाई को अन्याय और अत्याचार बताया।
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