CJP में घमासान! कोर कमेटी को लेकर अभिजीत दीपके के घर के बाहर कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

HIGHLIGHTS
- जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़े सभी कोऑर्डिनेटर्स को प्रतिनिधित्व देने की मांग।
- अभिजीत दीपके के घर के बाहर प्रदर्शन, पारदर्शी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की उठी मांग।
- कार्यकर्ताओं ने भाई-भतीजावाद और पक्षपात के आरोप लगाते हुए अनशन की चेतावनी दी।
छत्रपति संभाजीनगर। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की कोर कमेटी के गठन को लेकर विवाद गहरा गया है। अभिजीत दीपके के आवास के बाहर पहुंचे कुछ युवाओं ने पार्टी नेतृत्व पर भाई-भतीजावाद और पक्षपात के आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि जंतर-मंतर छात्र आंदोलन से जुड़े सभी कोऑर्डिनेटर्स को संगठन में उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए।
प्रदर्शन कर रहे युवाओं का कहना है कि वे जंतर-मंतर छात्र आंदोलन की शुरुआत से ही सक्रिय रहे और अलग-अलग राज्यों में समन्वय की जिम्मेदारी निभाई। उनका आरोप है कि हाल ही में हुई कोर कमेटी की बैठक में केवल अभिजीत दीपके के करीबी लोगों को बुलाया गया, जबकि आंदोलन से जुड़े कई प्रमुख कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर दिया गया।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि देशभर के युवाओं का था। उनका दावा है कि जंतर-मंतर आंदोलन में करीब 450 कोऑर्डिनेटर्स जुड़े थे, लेकिन कोर कमेटी के गठन के दौरान उनमें से अधिकांश को शामिल नहीं किया गया।
युवाओं ने यह भी आरोप लगाया कि देर रात तक पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका से इस मुद्दे पर बातचीत हुई, लेकिन उनकी ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक आंदोलन से जुड़े सभी युवाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता, तब तक वे अभिजीत दीपके के घर के बाहर धरना और अनशन जारी रखेंगे।
सीजेपी कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने मीडिया से बातचीत में कहा कि एक समूह बनाया गया है और सभी चाहते हैं कि संगठन के फैसले पूरी तरह लोकतांत्रिक तरीके से लिए जाएं। उन्होंने कहा कि उन्हें सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखना अच्छा नहीं लग रहा, लेकिन जब तक आवाज नहीं उठाई जाएगी, तब तक उनकी बात नहीं सुनी जाएगी। उन्होंने बताया कि इसी कारण उन्होंने अन्न-जल त्यागने का फैसला लिया है और जब तक पारदर्शी तरीके से टीम का गठन नहीं होगा, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।
मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा कि आंदोलन से जुड़े सैकड़ों कार्यकर्ताओं का सवाल है कि फैसले कुछ चुनिंदा लोग ही क्यों ले रहे हैं। यदि लोकतंत्र की बात की जाती है तो निर्णय प्रक्रिया भी लोकतांत्रिक होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बैठकों में परिवार के सदस्यों और करीबी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि अन्य कार्यकर्ताओं की बात तक नहीं सुनी जा रही। उनके अनुसार, जिस आंदोलन की शुरुआत भाई-भतीजावाद और पक्षपात के खिलाफ हुई, उसमें ऐसी प्रवृत्ति की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने हाल ही में आंदोलन से जुड़े पांच प्रमुख चेहरों से मुलाकात की थी। उनका कहना था कि यदि उन लोगों को बैठक में शामिल किया जाता और उनकी राय ली जाती तो विवाद की स्थिति नहीं बनती। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर आंदोलन इसी तरह आगे बढ़ा तो इसकी विश्वसनीयता और भविष्य दोनों प्रभावित होंगे।
मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा कि सभी स्वयंसेवकों और हर राज्य के प्रतिनिधियों को बिना किसी भेदभाव के संगठन में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आंदोलन की जवाबदेही तय होना जरूरी है और संगठन का संचालन पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। उनका कहना है कि जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
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