केरल विधानसभा में वंदे मातरम को लेकर विवाद, सरकार और राज्यपाल आमने-सामने

केरल की नई विधानसभा के पहले ही कार्यदिवस पर वंदे मातरम के गायन को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। राज्य सरकार और राज्यपाल कार्यालय के बीच यह मुद्दा पहली खुली तनातनी के रूप में देखा जा रहा है। मामला उस समय सामने आया जब राज्यपाल के नीतिगत संबोधन से पहले विधानसभा में राष्ट्रगीत का केवल शुरुआती हिस्सा बजाया गया।
पूरा वंदे मातरम नहीं बजाने पर विवाद
जानकारी के अनुसार, केरल पुलिस बैंड ने सदन में वंदे मातरम का केवल प्रारंभिक अंश प्रस्तुत किया। जबकि राज्यपाल कार्यालय ने पूर्वाभ्यास के दौरान निर्देश दिया था कि राष्ट्रगीत का पूर्ण संस्करण बजाया जाए। हालांकि, राज्य सरकार ने पुरानी परंपरा का हवाला देते हुए केवल शुरुआती हिस्से को ही बजाने का फैसला कायम रखा।
राजनीतिक हलकों में इसे नई कांग्रेस नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार और राजभवन के बीच उभरते मतभेदों का संकेत माना जा रहा है। विधानसभा के गठन के बाद यह पहला बड़ा विवाद है।
विधानसभा में बदला राजनीतिक समीकरण
हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद 140 सदस्यीय सदन में यूडीएफ को स्पष्ट बहुमत मिला है। गठबंधन के पास 102 विधायक हैं, जबकि वाम मोर्चा 35 सीटों तक सीमित रह गया। वहीं भाजपा ने पहली बार केरल विधानसभा में तीन सीटों के साथ प्रवेश किया है, जिससे राज्य की राजनीति में नया समीकरण बना है।
राज्यपाल ने विवाद पर चुप्पी साधी
तनावपूर्ण माहौल के बावजूद राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने अपने संबोधन के दौरान इस मुद्दे का कोई जिक्र नहीं किया। उन्होंने मलयालम में “नमस्कारम” कहकर भाषण की शुरुआत की और सरकार के साथ किसी भी मतभेद पर सार्वजनिक टिप्पणी से बचते नजर आए।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम भविष्य में सरकार और राजभवन के रिश्तों को प्रभावित कर सकता है। यूडीएफ सरकार परंपराओं और प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों में अपने रुख को स्पष्ट करना चाहती है, जबकि राज्यपाल कार्यालय भी अपने निर्देशों की अनदेखी को हल्के में नहीं लेगा।
भाजपा ने सरकार पर साधा निशाना
भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी नेता और विधायक वी मुरलीधरन ने आरोप लगाया कि राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों में केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के मुताबिक पूरा वंदे मातरम गाया जाना चाहिए था, लेकिन केरल सरकार ने ऐसा नहीं किया।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में इसे राजभवन और राज्यपाल का अपमान बताया। भाजपा का आरोप है कि यूडीएफ सरकार ने कुछ राजनीतिक और वैचारिक दबावों के चलते यह फैसला लिया।
पहले भी उठ चुका है विवाद
यह पहली बार नहीं है जब केरल में वंदे मातरम को लेकर विवाद हुआ हो। इससे पहले यूडीएफ मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह में भी पूर्ण राष्ट्रगीत प्रस्तुति पर राजनीतिक बहस छिड़ी थी। वाम दलों ने उस समय इसे धर्मनिरपेक्ष और बहुलतावादी मूल्यों के खिलाफ बताते हुए आपत्ति जताई थी।
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