दिल्ली पुलिस की NSA शक्ति बढ़ी, क्या प्रदर्शनकारियों पर और सख्त होगी कार्रवाई?

HIGHLIGHTS
- दिल्ली पुलिस को NSA के तहत हिरासत की शक्ति 18 अक्टूबर तक बढ़ाई गई।
- पुलिस ने साफ किया कि यह नई शक्ति नहीं, बल्कि सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत नवीनीकरण है।
- पेपर लीक विरोध प्रदर्शन और संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के बीच यह फैसला सामने आया है।
नई दिल्ली: दिल्ली के उपराज्यपाल ने दिल्ली पुलिस को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत किसी व्यक्ति को एहतियातन हिरासत में लेने की शक्ति को 18 अक्टूबर तक बढ़ा दिया है। इस संबंध में एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने उन आरोपों को खारिज किया है कि राजधानी में पेपर लीक के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों में शामिल लोगों को हिरासत में लेने के लिए उसे NSA के तहत नई शक्तियां दी गई हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह आदेश एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया गया नवीनीकरण है, जो लंबे समय से लागू है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में प्रदर्शन जारी है। कुछ दिन पहले हजारों लोगों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। इस दौरान हुई हिंसा में कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
गृह विभाग की अधिसूचना में क्या कहा गया?
दिल्ली सरकार के गृह विभाग की ओर से 15 जुलाई को जारी अधिसूचना के अनुसार, दिल्ली पुलिस आयुक्त को NSA की धारा 3 की उपधारा (2) के तहत हिरासत में लेने की शक्ति दी गई है। यह अधिकार 18 अक्टूबर तक प्रभावी रहेगा।
क्या है NSA?
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) केंद्र और राज्य सरकारों को ऐसे लोगों को एहतियातन हिरासत में रखने का अधिकार देता है, जिनकी गतिविधियों से देश की सुरक्षा को खतरा होने की आशंका हो।
NSA के तहत हिरासत की अवधि तीन महीने से लेकर 12 महीने तक हो सकती है। हालांकि, इसे निर्धारित अवधि से पहले भी समाप्त किया जा सकता है।
यह कार्रवाई एहतियाती हिरासत होती है, गिरफ्तारी नहीं। इसलिए हिरासत में लिए गए व्यक्ति को अदालत के सामने पेश करना अनिवार्य नहीं होता।
हर तीन महीने में होता है नवीनीकरण
दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि NSA के तहत हिरासत में लेने की शक्ति को सामान्य प्रक्रिया के तहत हर तीन महीने में बढ़ाया जाता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी विशेष अनुरोध के आधार पर यह फैसला नहीं लिया गया है।
अधिकारी के अनुसार, यह शक्ति 1980 के दशक से दी जाती रही है।
कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जून को जंतर-मंतर से अपना प्रदर्शन शुरू किया था।
संसद मार्च के दौरान हुआ था विवाद
20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद दिल्ली पुलिस को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। सीजेपी ने दावा किया था कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए और कई प्रदर्शनकारी खून से लथपथ हो गए।
वहीं, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर अनियंत्रित, आक्रामक और हिंसक व्यवहार करने का आरोप लगाया था। पुलिस का कहना था कि प्रदर्शनकारियों ने कई पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंके और पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, हिंसक प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों समेत 118 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
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