महिलाओं की सुरक्षा पर मौलाना साजिद राशिदी का बयान, बोले- इस्लामी कानून लागू होने तक नहीं होंगी सुरक्षित

HIGHLIGHTS
- मौलाना साजिद राशिदी ने मौजूदा परिस्थितियों को लेकर चिंता जताई।
- उन्होंने बेटियों की सुरक्षा को माता-पिता के लिए बड़ी चुनौती बताया।
- राशिदी ने महिलाओं के कार्यक्षेत्र में आने को लेकर अपनी राय रखी।
नई दिल्ली। दिल्ली में कांथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार की महिलाओं को लेकर की गई टिप्पणी पर ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद राशिदी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि देश में जब तक इस्लामी कानून लागू नहीं होते, तब तक महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकेगी।
मौलाना साजिद राशिदी ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में माता-पिता के लिए अपनी बेटियों को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती बन चुका है। उन्होंने कहा कि हर माता-पिता अपनी बेटी की सुरक्षा चाहते हैं, लेकिन स्वतंत्रता और समानता के नाम पर लड़कियों को कार्यक्षेत्र में लाने के लिए लगातार प्रयास किए गए।
उन्होंने दावा किया कि महिलाओं के मन में स्वतंत्रता और समानता की सोच डालकर उन्हें घर से बाहर निकलने के लिए प्रेरित किया गया और इसके बाद बर्बादी व अनैतिकता की शुरुआत हुई। उन्होंने कहा कि महिलाओं को पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने और हर क्षेत्र में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया गया।
राशिदी ने कहा कि प्रकृति की व्यवस्था के अनुसार महिला को घर पर रहकर गृहस्थी संभालने और बच्चों की देखभाल करने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। वहीं, उनके अनुसार पुरुषों को बाहर जाकर कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करने, आजीविका कमाने तथा पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण करने के लिए बनाया गया है।
उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा के लिए इस्लाम में निर्धारित सख्त कानून लागू करने या कम से कम यौन हिंसा करने वालों को कड़ी सजा देने की जरूरत बताई। राशिदी ने फिर कहा कि उनके अनुसार देश में इस्लामी कानून लागू होने तक महिलाएं सुरक्षित नहीं रहेंगी।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.




























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.