द्वारका दुर्घटना मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने मीडिया कवरेज पर रोक की मांग ठुकराई

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने द्वारका सड़क हादसा मामले में आरोपी नाबालिग के पिता की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मीडिया कवरेज पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि नाबालिग की पहचान सार्वजनिक नहीं की जा सकती और इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और मिनिस्ट्री ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। साथ ही संबंधित पक्षों को निर्देश दिया गया कि वे किसी भी उद्देश्य से—चाहे वह चरित्र प्रमाण पत्र हो या अन्य कारण—नाबालिग से जुड़े दस्तावेज या रिकॉर्ड सार्वजनिक न करें। मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को निर्धारित की गई है।
अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा कि किसी प्रकरण की रिपोर्टिंग पर पूर्ण रोक नहीं लगाई जा सकती। पिता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि लगातार मीडिया कवरेज से परिवार पर मानसिक और सामाजिक दबाव बढ़ रहा है तथा इससे नाबालिग की पहचान उजागर होने का खतरा पैदा हो गया है।
इस पर न्यायालय ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता पर व्यापक प्रतिबंध लगाने का कोई वैधानिक आधार प्रस्तुत नहीं किया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी विशेष रिपोर्ट से वास्तविक और ठोस शिकायत हो तो उसे अलग से उठाया जा सकता है, लेकिन समूची मीडिया कवरेज पर रोक लगाने का आदेश पारित नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता पर सामान्य आदेश के जरिए अंकुश नहीं लगाया जा सकता। साथ ही पूछा कि किस प्रावधान के तहत ऐसा व्यापक प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
अदालत ने दोहराया कि नाबालिग की पहचान की गोपनीयता सुनिश्चित की जाएगी, लेकिन समाचार कवरेज पर पूर्ण रोक संभव नहीं है।
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