दिल्ली-NCR समेत कई राज्यों में भूकंप के झटके, सहमे लोग घरों से निकले बाहर

HIGHLIGHTS
- नेशनल सिस्मोलॉजी सेंटर ने भूकंप की तीव्रता 4.9 बताई।
- भूकंप का केंद्र चमोली जिले में 13 किलोमीटर की गहराई में था।
- रात करीब 10:24 बजे कई इलाकों में झटके महसूस किए गए।
उत्तराखंड से लेकर दिल्ली-एनसीआर तक मंगलवार रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। उत्तराखंड के गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक कई जिलों में धरती हिली। नेशनल सिस्मोलॉजी सेंटर के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.9 मापी गई। इसका केंद्र उत्तराखंड के चमोली जिले में जमीन की सतह से 13 किलोमीटर नीचे था।
जानकारी के मुताबिक, रात करीब 10:24 बजे बागेश्वर, भीमताल, पिथौरागढ़, चंपावत, हल्द्वानी, खटीमा, रुद्रप्रयाग, ऋषिकेश, गोपेश्वर, चमोली और बदरीनाथ में भूकंप के झटके महसूस किए गए।
क्यों आता है भूकंप?
पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स मौजूद हैं, जो लगातार गति करती रहती हैं। जिन जगहों पर इन प्लेट्स के बीच ज्यादा टकराव होता है, उसे फॉल्ट लाइन जोन कहा जाता है। बार-बार टकराने के कारण प्लेट्स के किनारे मुड़ते हैं। जब दबाव अधिक बढ़ जाता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। इसके बाद धरती के अंदर मौजूद ऊर्जा बाहर निकलने का रास्ता तलाशती है और इस हलचल के बाद भूकंप आता है।
क्या होता है भूकंप का केंद्र और तीव्रता का मतलब?
भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहा जाता है, जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल के कारण भूगर्भीय ऊर्जा बाहर निकलती है। इसी स्थान पर भूकंप का कंपन सबसे ज्यादा होता है। इससे दूरी बढ़ने के साथ कंपन की आवृत्ति और उसका प्रभाव कम होता जाता है।
हालांकि, अगर रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 7 या उससे अधिक हो तो इसके आसपास करीब 40 किलोमीटर के दायरे में झटके तेज महसूस हो सकते हैं। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की दिशा में है या किसी दायरे में। अगर कंपन की आवृत्ति ऊपर की ओर होती है तो प्रभावित क्षेत्र कम हो सकता है।
भूकंप की तीव्रता कैसे मापी जाती है?
भूकंप की जांच रिक्टर स्केल के जरिए की जाती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल भी कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। इसकी माप भूकंप के केंद्र यानी एपीसेंटर से की जाती है।
भूकंप के दौरान धरती के भीतर से निकलने वाली ऊर्जा की तीव्रता को इस पैमाने से मापा जाता है। इसी तीव्रता के आधार पर भूकंप के झटकों की भयावहता का अंदाजा लगाया जाता है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.


























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.