पंजाब भाजपा के वरिष्ठ नेता चुन्नी लाल भगत का निधन, जालंधर में शोक की लहर

HIGHLIGHTS
- विभाजन के बाद उन्होंने जालंधर में अपना जीवन दोबारा शुरू किया
- उन्होंने शीला स्पोर्ट्स के जरिए खेल सामान के कारोबार में पहचान बनाई
- 1985 में पहली बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा
पंजाब के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री चुन्नी लाल भगत का निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद जालंधर के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है।
चुन्नी लाल भगत का जीवन संघर्ष, कारोबार, समाजसेवा और राजनीति के लंबे सफर से जुड़ा रहा। पाकिस्तान से भारत आने के बाद उन्होंने जालंधर को अपनी कर्मभूमि बनाया। यहां उन्होंने कारोबार खड़ा किया और इसके साथ ही राजनीति में भी अपनी पहचान बनाई। आगे चलकर वह पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी तक पहुंचे।
चुन्नी लाल भगत का जन्म सियालकोट में हुआ था। देश के विभाजन के बाद उन्हें पाकिस्तान छोड़कर भारत आना पड़ा। विस्थापन के उस दौर में उन्होंने जालंधर में नए सिरे से जीवन शुरू किया और मेहनत के दम पर अपना कारोबार स्थापित किया। समय के साथ उन्होंने खेल सामान के कारोबार में पहचान बनाई और शीला स्पोर्ट्स के नाम से कारोबार को खड़ा किया।
कारोबार के दौरान जालंधर के सामाजिक और व्यावसायिक वर्ग में उनका संपर्क बढ़ता गया। यही जनसंपर्क आगे चलकर उनकी राजनीतिक यात्रा का आधार बना।
1985 में पहली बार चुनाव लड़ा
राजनीति में आने के बाद चुन्नी लाल भगत ने खुद को सिर्फ चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने जालंधर में संगठन को मजबूत करने और लोगों के बीच अपनी पकड़ बनाने पर ध्यान दिया।
वर्ष 1985 में उन्होंने पहली बार चुनावी राजनीति में कदम रखा। उन्होंने जालंधर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा, हालांकि इस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने राजनीतिक मैदान नहीं छोड़ा।
इसके बाद भाजपा के साथ उनका राजनीतिक जुड़ाव मजबूत हुआ। पार्टी संगठन में सक्रिय रहते हुए उन्होंने जालंधर में अपना जनाधार तैयार किया। वर्ष 1997 में उन्हें भाजपा के टिकट पर जालंधर दक्षिण विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का मौका मिला और उन्होंने जीत दर्ज कर पहली बार पंजाब विधानसभा में प्रवेश किया।
वर्ष 2007 में उन्होंने इसी सीट से एक बार फिर जीत हासिल की और विधानसभा में अपनी स्थिति मजबूत की।
2012 में जालंधर पश्चिम से जीते
विधानसभा परिसीमन के बाद जालंधर दक्षिण सीट के स्वरूप में बदलाव हुआ। वर्ष 2012 में चुन्नी लाल भगत ने जालंधर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और यहां भी जीत दर्ज की।
लगातार चुनावी सफलताओं के बाद वह जालंधर के साथ-साथ पंजाब भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए। उनके राजनीतिक प्रभाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2011 में उन्हें पंजाब विधानसभा का उपाध्यक्ष चुना गया था।
इसके बाद वर्ष 2012 में उन्हें भाजपा विधायक दल के नेता की जिम्मेदारी भी मिली। यह पार्टी और विधानसभा के भीतर उनके बढ़ते राजनीतिक प्रभाव को दर्शाता था।
बादल सरकार में बने कैबिनेट मंत्री
वर्ष 2012 में प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में अकाली-भाजपा गठबंधन की सरकार बनी। इस सरकार में चुन्नी लाल भगत को कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
सरकार में उन्हें महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने स्थानीय निकाय तथा चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान जैसे विभाग संभाले। बाद में उनके पास वन एवं वन्यजीव संरक्षण और श्रम जैसे विभागों की जिम्मेदारी भी रही।
पाकिस्तान से जालंधर तक का सफर
चुन्नी लाल भगत के राजनीतिक सफर को उनके शुरुआती जीवन के संघर्ष से अलग करके नहीं देखा जा सकता। पाकिस्तान के सियालकोट से विस्थापन के बाद जालंधर में नई शुरुआत करना, कारोबार स्थापित करना और फिर सार्वजनिक जीवन में अपनी जगह बनाना उनके जीवन की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा।
उन्होंने कारोबार से सामाजिक संपर्क और फिर सामाजिक संपर्क से राजनीति तक का सफर तय किया।
जालंधर में शीला स्पोर्ट्स उनके कारोबारी जीवन की अहम पहचान बनी। खेल सामान के कारोबार से जुड़े होने के कारण शहर के खेल जगत और अलग-अलग सामाजिक वर्गों के लोगों से उनका संपर्क रहा। यही संपर्क आगे चलकर उनके राजनीतिक जनाधार में बदल गया।
राजनीति में आने के बाद उन्होंने जालंधर को अपना मजबूत राजनीतिक आधार बनाया और कई चुनावों में भाजपा का प्रतिनिधित्व किया।
बेटे मोहिंदर भगत ने संभाली राजनीतिक विरासत
चुन्नी लाल भगत की राजनीतिक विरासत को उनके बेटे मोहिंदर भगत ने आगे बढ़ाया। मोहिंदर भगत भी जालंधर पश्चिम की राजनीति में सक्रिय रहे। हालांकि बाद में उन्होंने अलग राजनीतिक राह चुनी और आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए।
वर्ष 2024 के जालंधर पश्चिम विधानसभा उपचुनाव में मोहिंदर भगत ने आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसके बाद उन्हें पंजाब की मौजूदा आम आदमी पार्टी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
इस तरह पिता और पुत्र दोनों ने जालंधर की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, हालांकि दोनों का राजनीतिक सफर अलग-अलग दलों के साथ आगे बढ़ा।
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