लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में होगा बड़ा एक्शन, 9 IAS और 9 PCS अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश

HIGHLIGHTS
- लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड मामले में 9 IAS और 9 PCS अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
- अवैध इमारत में लगी आग की जांच के बाद LDA से जुड़े कई अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में आई है।
लखनऊ। राजधानी के अलीगंज सेक्टर-डी स्थित अवैध इमारत में 22 जून को हुए भीषण अग्निकांड की जांच अंतिम चरण में पहुंच गई है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी रिपोर्ट में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के 9 आईएएस और 9 पीसीएस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। रिपोर्ट जल्द ही राज्य सरकार को सौंपी जा सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट मिलने के बाद नियुक्ति विभाग संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांग सकता है। इस मामले में पहली बार वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की गई है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर बनी थी SIT
22 जून को अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित एक अवैध व्यावसायिक भवन में भीषण आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 9 अन्य घायल हुए थे। हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं घटनास्थल पहुंचे थे और मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए थे।
जांच की जिम्मेदारी अपर मुख्य सचिव (पर्यटन) अमृत अभिजात और एडीजी लखनऊ जोन प्रवीण कुमार को सौंपी गई थी।
LDA के अधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में
जांच के दौरान एसआईटी ने वर्ष 2016 से 2024 के बीच एलडीए के जोन-4 और जोन-5 में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों का पूरा रिकॉर्ड मांगा। विशेष रूप से उस भूखंड पर आवासीय अनुमति के बावजूद व्यावसायिक निर्माण कैसे हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार था, इसकी पड़ताल की गई।
एलडीए ने एसआईटी को 100 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची उपलब्ध कराई। इनमें आईएएस, पीसीएस अधिकारियों के अलावा इंजीनियरिंग शाखा के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं।
कई वरिष्ठ अधिकारी कार्रवाई के दायरे में
सूत्रों के अनुसार, जिन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है, उनमें वर्तमान में विभिन्न जिलों में तैनात कुछ जिलाधिकारी, एलडीए के मौजूदा अधिकारी और दो सेवानिवृत्त अधिकारी भी शामिल हैं।
इसके अलावा इंजीनियरिंग विभाग के 14 अधिशासी एवं सहायक अभियंताओं तथा 52 अवर अभियंताओं की भूमिका की भी जांच की गई है। रिपोर्ट में इनमें से कई अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की सिफारिश किए जाने की जानकारी सामने आई है।
रिपोर्ट सौंपने में हुई देरी
शासन ने एसआईटी को सात दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था, लेकिन विस्तृत जांच और गवाहों के बयान दर्ज करने के कारण रिपोर्ट तय समय में नहीं दी जा सकी।
एसआईटी ने 24 और 25 जून को घटनास्थल का निरीक्षण किया, 26 जून को भवन मालिक को नोटिस जारी किया और 27 जून तक अधिकांश गवाहों एवं संबंधित अधिकारियों के बयान दर्ज किए। इसके बाद जांच पूरी कर रिपोर्ट तैयार कर ली गई, जिसे अब जल्द शासन को सौंपा जाएगा।
भवन मालिक पर भी कार्रवाई जारी
इस मामले में भवन मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ल समेत चार आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। वहीं एक अन्य आरोपी सुरेंद्र प्रसाद शुक्ल अभी फरार है, जिस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।
उधर, अवैध भवन को लेकर सक्षम न्यायालय में सुनवाई जारी है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भवन को ध्वस्त करने की कार्रवाई भी तेज होने की संभावना है।
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