अफजाल अंसारी के शस्त्र लाइसेंस की जांच तेज, 1987 में खरीदी राइफल का नहीं मिला रिकॉर्ड

HIGHLIGHTS
- आईएस-191 गैंग से जुड़े शस्त्र लाइसेंसों की जांच में अफजाल अंसारी की राइफल का रिकॉर्ड नहीं मिला।
- 1987 में खरीदी गई राइफल के विक्रय और वर्तमान स्थिति की जानकारी पुलिस को नहीं मिली।
- अफजाल अंसारी समेत तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच जारी है।
गाजीपुर। आईएस-191 गैंग से जुड़े शस्त्र लाइसेंसों की जांच में पुलिस अब उन हथियारों की जानकारी जुटाने में लगी है, जिनके रिकॉर्ड पुराने अभिलेखों में अधूरे पाए गए हैं।
इसी जांच के तहत सांसद अफजाल अंसारी के शस्त्र लाइसेंस संख्या 1188/पी-11 से जुड़े एनपीबी राइफल नंबर 44657 की मौजूदा स्थिति पुलिस के लिए बड़ा सवाल बनी हुई है।
जांच में पता चला है कि वर्ष 1987 में खरीदी गई इस राइफल के विक्रय से संबंधित कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। शस्त्र पंजिका में केवल 'सोल्ड' दर्ज है, लेकिन हथियार किसे और कब बेचा गया, इसकी जानकारी रिकॉर्ड में नहीं मिली।
लाइसेंस की मूल पत्रावली नहीं मिली
पुलिस जांच रिपोर्ट के अनुसार, जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के शस्त्र अभिलेखागार और एडीएम वित्त एवं राजस्व की जांच में लाइसेंस की मूल पत्रावली तथा खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं मिले। इसके कारण राइफल का भौतिक सत्यापन भी नहीं हो सका।
इस मामले में लाइसेंस धारक से स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन नोटिस के बाद भी कोई लिखित या संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि अफजाल अंसारी को जिला मजिस्ट्रेट गाजीपुर की ओर से तीन शस्त्र लाइसेंस जारी किए गए थे। इनमें लाइसेंस संख्या 1188/पी-11 की जांच के दौरान वर्ष 1987 में एनपीबी राइफल संख्या 44657 की खरीद का उल्लेख मिला। इसके बाद इसी लाइसेंस पर अन्य हथियारों की खरीद-बिक्री भी दर्ज है।
वर्ष 1990 में लाइसेंस रिकॉर्ड में राइफल के स्थान पर दूसरी राइफल खरीदे जाने का उल्लेख मिला।
शस्त्र अभिलेख गायब करने का आरोप
पुलिस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन शस्त्र लिपिकों की मिलीभगत से लाइसेंस से जुड़े मूल अभिलेख और हथियारों की खरीद-बिक्री संबंधी दस्तावेज गायब कराए गए, जिससे हथियारों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
इसी आधार पर कोतवाली में सांसद अफजाल अंसारी, तत्कालीन शस्त्र लिपिक गौरीशंकर लाल और सुग्रीव तिवारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
मुख्तार अंसारी और आईएस-191 गैंग से जुड़े 51 शस्त्र लाइसेंसों पर जारी 145 हथियारों की जांच जारी है। पुलिस के अनुसार, जहां भी रिकॉर्ड में अनियमितता या हथियारों के सत्यापन में समस्या सामने आएगी, वहां आगे कार्रवाई की जाएगी।
तीन दशक बाद भी नहीं मिला राइफल का रिकॉर्ड
जांच में सामने आया कि राइफल संख्या 44657 वर्ष 1987 में खरीदी गई थी। करीब चार दशक बाद भी इसके विक्रय की प्रक्रिया, खरीदार और वर्तमान स्थिति से जुड़े दस्तावेज पुलिस को नहीं मिल सके हैं।
शस्त्र पंजिका में केवल 'सोल्ड' दर्ज होने के कारण जांच एजेंसी हथियार की पूरी जानकारी जुटाने में असमर्थ रही है।
शस्त्र जांच में अब तक पांच मुकदमे
आईएस-191 गैंग से जुड़े शस्त्र लाइसेंसों की जांच में अब तक पांच मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें सांसद अफजाल अंसारी के खिलाफ तीन, मुख्तार अंसारी की पत्नी अफ्शा अंसारी के खिलाफ एक और अन्य लाइसेंस धारकों व संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है।
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