लखनऊ में शुरू हुआ देश का पहला मिलिट्री मेडिसिन विभाग, राजनाथ सिंह ने किया उद्घाटन

HIGHLIGHTS
- नए विभाग में ऑपरेशनल मेडिसिन, कॉम्बैट सर्जरी और ट्रॉमा केयर जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
- रक्षा बल विजन-2047 में बताए गए भविष्य के युद्ध संबंधी खतरों को ध्यान में रखते हुए तैयारियां मजबूत की जाएंगी।
- सेना ने CBRN खतरों से निपटने के लिए आधुनिक उपकरणों और तकनीक पर भी काम तेज किया है।
रासायनिक, परमाणु और रेडियोलॉजिकल हमलों से जुड़े खतरों पर अब लखनऊ में अध्ययन और शोध किया जाएगा। छावनी स्थित मध्य कमान के कमांड अस्पताल में बुधवार को देश के पहले मिलिट्री मेडिसिन विभाग की शुरुआत हुई। इसका उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वर्चुअल माध्यम से किया।
इस मौके पर रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए यह विभाग रासायनिक, जैविक, विकिरण और परमाणु संबंधी खतरों (CBRN) के अध्ययन और शोध का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि आज युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि व्यापक विनाश वाले हथियारों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि रासायनिक एजेंट, जैविक युद्ध और विकिरण संबंधी खतरों जैसे नए क्षेत्रों में यह विभाग शोध का केंद्र बनेगा। यहां ऑपरेशनल और मिलिट्री मेडिसिन, कॉम्बैट मेडिसिन, कॉम्बैट सर्जरी, ट्रॉमा केयर और बड़े स्तर पर हताहतों के प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता विकसित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस विभाग का लक्ष्य इसे दुनिया का सर्वश्रेष्ठ बैटलफील्ड मेडिसिन रिसर्च सेंटर बनाना है। मध्य कमान के जनसंपर्क अधिकारी शांतनु प्रताप सिंह ने बताया कि यह विभाग चिकित्सा सेवा महानिदेशालय (सेना) के तहत स्थापित किया गया है।
सैनिकों को मिलेगी उन्नत चिकित्सा सहायता
रक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि यह विभाग सैनिकों को बेहतर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूत करेगा। विभाग सैन्य आघात नियंत्रण, युद्ध मनोचिकित्सा और रासायनिक, जैविक, विकिरणीय, परमाणु एवं विस्फोटक (CBRNE) चिकित्सा प्रतिक्रिया जैसे विषयों पर काम करेगा।
इसके अलावा विभाग दूरस्थ चिकित्सा और अनुकरण आधारित प्रशिक्षण में नए प्रयोगों को भी बढ़ावा देगा। इसका विकास चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा, जिसमें पहले शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू होंगे और बाद में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
कार्यक्रम में सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, सेना उपप्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन, मध्य कमान के सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्या सेनगुप्ता और सेना चिकित्सा कोर की महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
सैन्य चिकित्सा के महत्व पर राजनाथ सिंह ने रखी बात
लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने सैन्य चिकित्सा के बढ़ते महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि सैन्य चिकित्सा युद्ध और युद्ध जैसी परिस्थितियों में मानव शरीर पर पड़ने वाले शारीरिक और मानसिक प्रभावों का अध्ययन करती है।
उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिक दुनिया के कई कठिन क्षेत्रों और चुनौतीपूर्ण जलवायु परिस्थितियों में तैनात रहते हैं। ऐसे में नया विभाग इन परिचालन परिस्थितियों के अनुसार चिकित्सा प्रोटोकॉल तैयार करने में मदद करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल से सैनिकों के स्वास्थ्य की रियल टाइम निगरानी संभव हो सकती है।
रक्षा बल विजन-2047 में CBRN खतरों पर जताई गई चिंता
हाल ही में जारी रक्षा बल विजन-2047 दस्तावेज में रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (CBRN) खतरों को लेकर चिंता जताई गई थी। इसमें भविष्य के युद्धों में इन चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक सुरक्षा प्रणाली विकसित करने का खाका पेश किया गया था।
दस्तावेज में कहा गया था कि भविष्य के खतरे अब पारंपरिक और छद्म युद्ध से आगे बढ़कर सामूहिक विनाश वाले हथियारों तक पहुंच चुके हैं। इसमें विशेष रूप से जैविक खतरों की पहचान और संक्रमण को रोकना बड़ी चुनौती बताया गया था, क्योंकि ये खतरे अदृश्य तरीके से फैल सकते हैं।
मौजूदा समय में सेना की तैयारी
वर्तमान में सेना के पास कोर ऑफ इंजीनियर्स के तहत एक विशेष दस्ता है, जो CBRN खतरों से जुड़े मामलों को संभालता है। पिछले साल सेना ने 223 ऑटोमैटिक केमिकल एजेंट डिटेक्शन एंड अलार्म सिस्टम खरीदे थे, जो वास्तविक समय में रसायनों की पहचान कर सकते हैं।
इसके अलावा स्वदेशी मोबाइल डिकंटेमिनेशन सिस्टम जैसे उपकरण भी उपलब्ध हैं। डीआरडीओ भी CBRN खतरों से बचाव के लिए आधुनिक तकनीक विकसित कर रहा है।
सरकार की कोशिश है कि अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ाकर एक एकीकृत सुरक्षा प्रणाली तैयार की जाए, जिससे किसी भी हमले की स्थिति में प्रतिक्रिया देने में लगने वाला समय कम किया जा सके।
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