मोहन भागवत ने मेरठ में साझा किए संघ से जुड़ने के पांच महत्वपूर्ण मंत्र

मेरठ। शुक्रवार को खिलाड़ियों के संवाद कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने हिंदू समाज में एकता और संगठन की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल आपसी बंधुत्व की भावना से जातिवाद, असमानता और भेदभाव जैसी समस्याओं को समाज से हटाया जा सकता है। यूजीसी से जुड़े सवालों पर उन्होंने इस बार मौन रहना ही उचित समझा।
देश का नाम बढ़ाने के लिए संघ
खिलाड़ियों से बात करते हुए डॉ. भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ का उद्देश्य व्यक्तिगत प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि देश का नाम बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज में अलगाव और विघटन को दूर करने के लिए सहयोग और बंधुत्व की भावना आवश्यक है। संघ की सैकड़ों सालों की यात्रा हमेशा समाज को संगठित करने पर केंद्रित रही है।
उन्होंने कहा कि संघ को केवल खेल या राजनीति के माध्यम से समझा नहीं जा सकता। इसके कार्य को जानने के लिए स्वयं इसमें शामिल होकर काम करना जरूरी है। डॉ. भागवत ने संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार का हवाला देते हुए बताया कि उस समय माना जाता था कि चार हिंदू कभी एक दिशा में नहीं चल सकते, लेकिन पांचवां कंधे पर हो तो यह संभव है। इसी विचारधारा से हिंदू समाज को संगठित करने के लिए संघ की स्थापना हुई।
संघ का उद्देश्य सत्ता नहीं, समाज संगठन है
डॉ. भागवत ने जोर देकर कहा कि संघ का मकसद सत्ता प्राप्त करना नहीं है। इसका लक्ष्य सभी हिंदुओं को संगठित करना और समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है। संघ किसी विशेष वर्ग के विरोध या प्रतिस्पर्धा के लिए नहीं काम करता। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू कोई जाति नहीं, बल्कि समाज के लिए एक विशेषण है। हमारी संस्कृति की नींव पूजा पद्धति, देवी-देवता की विविधता के बावजूद एकता में है।
उन्होंने बताया कि संघ का कार्य व्यक्ति निर्माण के माध्यम से समाज के हर क्षेत्र में सक्रियता बढ़ाना है। इसी दौरान खिलाड़ियों ने संघ से जुड़े सवाल पूछे, जिनका सरसंघचालक ने विस्तार से जवाब दिया।
संघ से जुड़ने के पांच मंत्र
डॉ. भागवत ने संघ से जुड़ने के पांच प्रमुख तरीके बताए:
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संघ के कार्यक्रमों में शामिल होकर संगठन को अंदर से समझें और किसी कार्य का दायित्व लें।
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संघ के किसी अनुषांगिक संगठन से जुड़कर काम करें।
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विभिन्न संघ कार्यक्रमों में किसी रूप में सहयोग करें।
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अपने काम के साथ संघ के कार्यक्रमों या स्वयंसेवकों से संवाद बनाए रखें।
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हमेशा देश के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य करें। ऐसा करने पर व्यक्ति स्वयंसेवक हो या न हो, उसे स्वयंसेवक माना जाएगा।
शनिवार को प्रमुख जनों से संवाद
डॉ. भागवत शनिवार को मेरठ और ब्रज प्रांत के शिक्षकों, उद्यमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अन्य प्रमुख जनों से मुलाकात करेंगे। इस संवाद में वे लोगों के सवालों के जवाब देंगे और संघ के उद्देश्य पर प्रकाश डालेंगे।






















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