मुजफ्फरनगर में नाला निर्माण को लेकर 11 दिन से चल रहा धरना खत्म, प्रशासन ने दिया लिखित आश्वासन

HIGHLIGHTS
- कांवड़ यात्रा के बाद संबंधित अभिलेखों की जांच कराई जाएगी।
- जरूरत पड़ने पर नाला निर्माण में बदलाव करने का आश्वासन दिया गया।
- सपा सांसद हरेंद्र मलिक और राकेश शर्मा ने प्रशासन से वार्ता की।
मुजफ्फरनगर। सर्कुलर रोड पर नगर पालिका परिषद की ओर से कराए जा रहे नाला निर्माण के अलाइनमेंट और निर्माण कार्य को लेकर पर्यावरण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र कोच का पिछले 11 दिनों से चल रहा अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल धरना रविवार रात करीब 10:30 बजे समाप्त हो गया। प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन खत्म करने पर सहमति बनी।
रविवार रात धरना स्थल पर सपा सांसद हरेंद्र मलिक और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राकेश शर्मा पहुंचे। दोनों नेताओं ने इस मामले को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत की। वार्ता के दौरान नगर पालिका परिषद मुज़फ़्फ़रनगर के अधिशासी अधिकारी की ओर से नगर मजिस्ट्रेट को भेजे गए पत्र में लिखित आश्वासन दिया गया कि कांवड़ यात्रा समाप्त होने के बाद संबंधित अभिलेखों की जांच कराकर नियमानुसार न्यायसंगत समाधान किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर नाला निर्माण में संशोधन भी किया जाएगा।
प्रशासन का लिखित आश्वासन मिलने के बाद सांसद हरेंद्र मलिक ने जितेंद्र कोच को माला पहनाकर और जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया। इसके साथ ही दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने पर सहमति बनी।
सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि नाला निर्माण से संबंधित समस्या को लेकर दोनों पक्षों में सहमति बन गई है। उन्होंने कहा कि नाला नियमों के अनुसार सड़क के किनारे बनी बाउंड्री वॉल से मिलाकर बनाया जाना चाहिए और इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में दलीय राजनीति नहीं होनी चाहिए। आपसी बातचीत, सौहार्द और सहमति से समस्या का समाधान निकालना ही उचित रास्ता है।
पर्यावरण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र कोच ने नाला निर्माण के अलाइनमेंट और निर्माण प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए 11 दिन पहले भूख हड़ताल शुरू की थी। उनका कहना था कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों और उचित अलाइनमेंट के अनुसार होना चाहिए।
प्रशासन की ओर से दिए गए लिखित आश्वासन में कांवड़ यात्रा के बाद संबंधित अभिलेखों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया गया है। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर नाला निर्माण में संशोधन करने की बात भी कही गई है।
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