मुजफ्फरनगर में जमीन विवाद को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं महिलाएं, जेसीबी चलाने का आरोप

HIGHLIGHTS
- विवाद खसरा संख्या 990 की जमीन को लेकर है
- ग्रामीण लंबे समय से जमीन को रास्ते के रूप में इस्तेमाल करते हैं
- महिलाओं ने करीब 100 वर्षों से गोबर-कूड़ा डालने की बात कही
मुजफ्फरनगर की सदर तहसील क्षेत्र के सादपुर गांव में जमीन को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। रविवार दोपहर करीब 2 बजे गांव की महिलाएं कलेक्ट्रेट पहुंचीं और प्रदर्शन किया। महिलाओं ने आरोप लगाया कि सरकारी बंजर भूमि को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट से स्टे होने के बावजूद दूसरे पक्ष के लोगों ने जेसीबी चलाकर जमीन पर कब्जे की कोशिश की।
महिलाओं के मुताबिक, खसरा संख्या 990 की जमीन का ग्रामीण लंबे समय से रास्ते के तौर पर इस्तेमाल करते आ रहे हैं। उनका आरोप है कि अब इसी जमीन को कब्रिस्तान के रूप में इस्तेमाल करने का प्रयास किया जा रहा है।
सरकारी बंजर भूमि होने का दावा
ग्रामीणों का कहना है कि विवादित जमीन सरकारी बंजर भूमि है और काफी समय से इसका इस्तेमाल गांव के लोग आने-जाने के लिए करते रहे हैं। महिलाओं ने बताया कि करीब 100 वर्षों से वे इस स्थान पर गोबर और कूड़ा डालती आ रही हैं।
उनका आरोप है कि अब मुस्लिम पक्ष के कुछ लोग जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं और इसे कब्रिस्तान के तौर पर दर्शाने की कोशिश की जा रही है।
हाईकोर्ट के स्टे के बावजूद जेसीबी चलाने का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार, जमीन से जुड़ा मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2025 को इस मामले में स्टे का आदेश दिया था। इसके बावजूद जेसीबी मशीन चलाकर खेतों की मेढ़ और पुस्ते तोड़ दिए गए।
ग्रामीणों का कहना है कि इससे खेतों तक जाने वाला रास्ता प्रभावित हुआ है और किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।
मवेशियों के लिए चारा लाने में परेशानी का दावा
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा कि रास्ता बंद होने के कारण मवेशियों के लिए चारा लाने में भी दिक्कत हो रही है। उनका दावा है कि उनकी निजी जमीन के करीब एक से दो बीघा हिस्से को भी कब्रिस्तान के दायरे में दिखाने का प्रयास किया जा रहा है।
महिलाओं ने प्रशासन से मौके पर जांच कराने और राजस्व अभिलेखों के आधार पर जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
डीएम कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने पहुंचीं महिलाएं
कलेक्ट्रेट पहुंची महिलाओं ने डीएम कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की। महिलाओं के अनुसार, मौके पर कोई अधिकारी उपलब्ध नहीं था, जिसके चलते उन्हें वापस लौटना पड़ा।
उन्होंने कहा कि अगर हाईकोर्ट का स्टे प्रभावी है तो इसके बावजूद जमीन पर निर्माण या कब्जे से जुड़ी कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
महिलाओं ने कथित तौर पर जेसीबी चलाने और ग्रामीणों का रास्ता बाधित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने सरकारी बंजर भूमि से कथित कब्जा हटाने और ग्रामीणों के आवागमन का रास्ता बहाल कराने की मांग रखी।
हालांकि, जमीन के स्वामित्व, कब्रिस्तान की स्थिति और हाईकोर्ट के आदेश के उल्लंघन को लेकर लगाए गए आरोपों पर प्रशासन या दूसरे पक्ष की ओर से फिलहाल कोई पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में इन आरोपों की पुष्टि राजस्व अभिलेखों और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
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