NEET परीक्षा विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने NTA को लगाई फटकार, केंद्र से मांगा हलफनामा

HIGHLIGHTS
- NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि वह इस पूरे प्रकरण की जांच की कुछ समय तक निगरानी करेगा।
- कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परीक्षा की पारदर्शिता और उसकी शुचिता से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
- सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि इस तरह की घटनाएं छात्रों के भविष्य को गहरे तौर पर प्रभावित करती हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
- कोर्ट ने कहा कि युवाओं के साथ इस प्रकार का विश्वासघात किस…
नई दिल्ली। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि वह इस पूरे प्रकरण की जांच की कुछ समय तक निगरानी करेगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परीक्षा की पारदर्शिता और उसकी शुचिता से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि इस तरह की घटनाएं छात्रों के भविष्य को गहरे तौर पर प्रभावित करती हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। कोर्ट ने कहा कि युवाओं के साथ इस प्रकार का विश्वासघात किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।
केंद्र सरकार से विस्तृत हलफनामा मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करे, जिसमें यह बताया जाए कि NEET परीक्षा के आयोजन और संचालन की प्रक्रिया को कैसे अधिक मजबूत और संस्थागत बनाया जाएगा। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि NTA की कार्यप्रणाली को किस तरह और अधिक सुरक्षित व पारदर्शी बनाया जा सकता है।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि सरकार को यह भी बताना होगा कि NTA के भीतर विशेषज्ञों और प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती के जरिए संस्थागत क्षमता कैसे विकसित की जाएगी, ताकि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की चूक की गुंजाइश न रहे।
छह सप्ताह में देना होगा जवाब
कोर्ट ने केंद्र सरकार और NTA को इस संबंध में अपनी विस्तृत कार्ययोजना पेश करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में 2024 और 2026 जैसी घटनाएं दोबारा न हों और परीक्षा प्रणाली अधिक मजबूत बन सके।
सुनवाई के दौरान अदालत ने NTA और उच्चाधिकार प्राप्त समिति के अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन द्वारा दाखिल रिपोर्टों पर भी विचार किया।
जिम्मेदारी तय करने पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से सवाल किया कि बार-बार पेपर लीक जैसी घटनाएं कैसे हो रही हैं और इन्हें रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर भविष्य में ऐसी कोई घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय की जानी चाहिए।
सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री स्वयं इस पूरे मुद्दे पर नजर रख रहे हैं और सरकार परीक्षा प्रणाली की शुचिता बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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