प्याज के बफर स्टॉक पर सरकार का बड़ा अपडेट, ‘सड़ने की खबरें अफवाह’

HIGHLIGHTS
- केंद्र ने प्याज के बफर स्टॉक की गुणवत्ता को अच्छी बताया
- इस साल भंडारण की जिम्मेदारी सीडब्ल्यूसी को दी गई
- तीसरी पार्टी नियमित अंतराल पर स्टॉक की गुणवत्ता जांच रही है
नई दिल्ली। प्याज की बढ़ती कीमतें पहले भी दिल्ली की राजनीति पर असर डाल चुकी हैं। इसी को देखते हुए इस बार कीमतों में तेजी आते ही बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए भंडारण व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
उपभोक्ता मामले की सचिव निधि खरे ने बताया कि इस साल पहली बार केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) को प्याज के भंडारण की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि इसकी शेल्फ लाइफ बेहतर बनी रहे।
उन्होंने कहा कि केंद्र के पास मौजूद प्याज का बफर स्टॉक अच्छी गुणवत्ता का है। निधि खरे ने उन रिपोर्टों को खारिज किया, जिनमें दावा किया गया था कि सरकार द्वारा बनाए गए 1.21 लाख टन प्याज के बफर स्टॉक का 30 प्रतिशत खराब हो गया है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं हुआ है और स्टॉक की गुणवत्ता अच्छी है।
सीडब्ल्यूसी के जिम्मे प्याज का भंडारण
पिछले वर्षों में प्याज का बफर स्टॉक व्यापारियों के पास रखा जाता था, लेकिन इस बार इसकी जिम्मेदारी सीडब्ल्यूसी को दी गई है। इसके साथ ही एक तीसरी पार्टी नियमित अंतराल पर स्टॉक की गुणवत्ता की जांच कर रही है।
प्याज के भंडारण की प्रक्रिया के बारे में निधि खरे ने बताया कि प्याज में करीब 90 प्रतिशत पानी होता है और कटाई के बाद लगभग तीन महीने तक यह अपनी गुणवत्ता बनाए रखता है।
इसके बाद पानी कम होने के कारण प्याज हर महीने सिकुड़ता है। वहीं, सड़न की मात्रा भंडारण की स्थिति और वेंटिलेशन पर निर्भर करती है।
इस साल प्याज की रिकवरी 72 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह 2022 में 49 प्रतिशत, 2023 में 54 प्रतिशत और 2024 में 63 प्रतिशत थी। प्याज की खरीद नाफेड और एनसीसीएफ जैसी एजेंसियों के माध्यम से की जाती है।
कांदा एक्सप्रेस से आपूर्ति बढ़ाने की तैयारी
बफर स्टॉक से प्याज को "कांदा एक्सप्रेस" के जरिए दिल्ली, चेन्नई, मदुरै, एर्नाकुलम और गुवाहाटी जैसे शहरों में भेजा जा रहा है। शुक्रवार को 453 टन प्याज दिल्ली पहुंची।
इससे दिल्ली-एनसीआर और आसपास के शहरों में प्याज की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही कीमतों को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी। खुदरा कीमतों में कमी एक सप्ताह के भीतर दिखाई देने की संभावना जताई गई है।
उपभोक्ता मामले की सचिव निधि खरे ने बताया, "पहला कांदा एक्सप्रेस, जिसमें 21 वैगनों में 453.65 टन प्याज है, सुबह राष्ट्रीय राजधानी पहुंचा।"
नासिक में रखे गए प्याज को दिल्ली-एनसीआर में 35 रुपये प्रति किलोग्राम की सब्सिडी दर पर बेचा जाएगा। इसके अलावा कुछ स्टॉक चंडीगढ़, लुधियाना और जम्मू जैसे आसपास के शहरों में भी भेजा जाएगा।
खरीफ और रबी फसल को लेकर सकारात्मक संकेत
प्याज की खरीफ फसल को लेकर भी स्थिति आशाजनक बताई जा रही है, क्योंकि अलनीनो का डर अब खत्म हो गया है। निधि खरे ने प्याज की रबी फसल पर अलनीनो के असर को लेकर जताई जा रही चिंताओं को भी दूर किया।
सिंचाई व्यवस्था में सुधार हुआ है और प्रमुख जलाशयों में जल स्तर भी ठीक है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में गुरुवार को प्याज की खुदरा कीमत 88 प्रतिशत बढ़कर 62 रुपये प्रति किलो पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यह 33 रुपये प्रति किलो थी।
देश में प्याज का औसत खुदरा मूल्य 46.58 रुपये प्रति किलो रहा, जबकि इसी दिन थोक कीमत 38.29 रुपये प्रति किलो थी। कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद आने वाले महीनों में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए प्याज की उपलब्धता पर्याप्त रहने की उम्मीद है।
इसका आधार 2025-26 में प्याज के 307.37 लाख टन उत्पादन का अनुमान है, जो पिछले साल के 307.67 लाख टन के करीब है।
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