दिल्ली दंगा षड्यंत्र मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को हाईकोर्ट से नहीं मिली जमानत

HIGHLIGHTS
- दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और दिनेश भट्ट की खंडपीठ ने फैसला सुनाया।
- दोनों की जमानत याचिकाओं पर बुधवार को आदेश पारित किया गया।
- सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज की थीं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली दंगों के षड्यंत्र मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और दिनेश भट्ट की खंडपीठ ने मामले में आदेश पारित करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में संशोधन नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट पहले ही जमानत याचिका कर चुका है खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। शीर्ष अदालत ने कहा था कि दोनों एक साल बाद या संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
हाईकोर्ट ने इन आधारों पर जमानत से किया इनकार
जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने पांच अन्य आरोपियों को जमानत दे दी थी, जबकि उमर खालिद और शरजील इमाम को राहत नहीं मिली थी। हाईकोर्ट ने पाया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय दोनों शर्तें अभी पूरी नहीं हुई हैं। ऐसे में जमानत देना शीर्ष अदालत के आदेश में बदलाव करने जैसा होगा।
तीसरी बार जमानत याचिका हुई खारिज
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश में कोई त्रुटि नहीं पाई और दोनों की अपीलों को खारिज कर दिया। यह तीसरी बार है जब हाईकोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज की हैं। इससे पहले दोनों ने ट्रायल कोर्ट का रुख किया था, जहां 4 जुलाई को उनकी याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं।
जमानत के लिए क्या दी गई दलील?
उमर खालिद और शरजील इमाम की ओर से दायर जमानत याचिकाओं में सैयद इफ्तिखार अंद्राबी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया गया। उनकी ओर से तर्क दिया गया कि यह परिस्थितियों में बदलाव के समान है।
पुलिस ने इसका विरोध करते हुए कहा कि एक अलग मामले में समन्वय पीठ का फैसला उमर खालिद और शरजील इमाम के मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए निर्देशों को खत्म नहीं कर सकता। उमर खालिद के वकील प्रदीप पाइस ने ट्रायल में हो रही देरी के आधार पर जमानत की मांग की।
अभियोजन पक्ष ने क्या कहा?
पाइस ने दलील दी कि इस मामले में कुल 18 आरोपी हैं और इनमें से ज्यादातर को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। वहीं, शरजील इमाम के वकील तालिब मुस्तफा ने कहा कि जनवरी 2026 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश में यह कहा गया था कि ट्रायल में प्रगति नहीं होने पर हिरासत जमानत का आधार बन सकती है। उन्होंने कहा कि ट्रायल आगे नहीं बढ़ा है, इसलिए शरजील इमाम को जमानत दी जानी चाहिए।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका उन लोगों के समान नहीं है, जिन्हें जमानत पर रिहा किया गया है। राजू ने दोहराया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक दोनों जनवरी 2027 के बाद या संरक्षित गवाहों की जांच के बाद ही जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
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