प्रयागराज: मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को जारी किया नोटिस

प्रयागराज। माघ मेले को लेकर प्रयागराज मेला प्राधिकरण और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच विवाद तेज हो गया है। मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी किया है और 24 घंटे में यह प्रमाण देने को कहा है कि वे ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य हैं।
मौलिक विवाद
मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम स्नान को लेकर दोनों पक्षों में तनातनी हुई थी। प्रशासन ने बिना स्नान कराए ही शंकराचार्य को शिविर में लौटना पड़ा। उनके शिष्यों के साथ पुलिस द्वारा कथित दुराचार और बल प्रयोग की भी शिकायतें सामने आई हैं। शंकराचार्य ने मीडिया के सामने उन शिष्यों को पेश किया जिनके साथ पुलिस ने कथित दुर्व्यवहार किया।
अविमुक्तेश्वरानंद के आरोप
शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इशारे पर उनके साथ अभद्रता की गई और उन्हें संगम में स्नान से रोका गया। उन्होंने कहा कि अगर वे रथ से उतर जाते तो उनकी हत्या की कोशिश होती। पुलिसकर्मियों ने सादे कपड़ों में उनका अपहरण करने की कोशिश की और उन्हें लगभग पांच घंटे तक अज्ञात स्थान पर रखा। शाम को उन्हें शिविर के सामने छोड़ दिया गया।
मेला प्रशासन का जवाब
मेला प्रशासन ने शंकराचार्य के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य का दर्जा नहीं दिया गया है, इसलिए उन्हें शंकराचार्य के प्रोटोकॉल का लाभ नहीं मिला। इसी क्रम में प्रशासन ने नोटिस जारी कर उनके शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा है। शंकराचार्य ने दोपहर तीन बजे प्रेसवार्ता कर नोटिस का जवाब देने की घोषणा की है और उन्होंने कहा कि वे भी मेला प्रशासन को नोटिस जारी करेंगे।
तीसरे दिन भी जारी धरना
शंकराचार्य का धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। त्रिवेणी मार्ग पर अपने शिविर के सामने फुटपाथ पर बैठे हुए शंकराचार्य के समर्थन में साधु-संतों के साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के लोग भी पहुंचे। उन्होंने मेला प्रशासन से माफी मांगने पर जोर दिया और कहा कि तब तक शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे जब तक उन्हें संगम में ससम्मान स्नान कराकर प्रवेश नहीं दिया जाता। शंकराचार्य ने यह भी कहा कि अगले साल भी इसी तरह मेले में आएंगे और फुटपाथ पर बैठकर विरोध जताएंगे।
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