NHAI टोल फर्जीवाड़े की जांच तेज, ED ने 7 राज्यों में 14 ठिकानों पर मारे छापे; 1.03 करोड़ रुपये बरामद

HIGHLIGHTS
- मामले की जांच 19 मई 2025 से शुरू की गई थी।
- कथित तौर पर अनधिकृत सॉफ्टवेयर से टोल रसीदें तैयार की जाती थीं।
- टोल की रकम को आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम से बाहर भेजे जाने का आरोप है।
लखनऊ। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अलग-अलग टोल प्लाजा पर कथित टोल कलेक्शन फर्जीवाड़े की जांच के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के लखनऊ जोनल कार्यालय ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई की। ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत उत्तर प्रदेश समेत सात राज्यों और क्षेत्रों में 14 ठिकानों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
ED के अनुसार, ये तलाशी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और कोलकाता में स्थित परिसरों में की जा रही है। कार्रवाई का उद्देश्य टोल कलेक्शन में कथित अनियमितताओं से जुड़े डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाना, लाभार्थियों की पहचान करना और अपराध से अर्जित रकम का पता लगाना है।
बिना अनुमति सॉफ्टवेयर से टोल रसीदों में फर्जीवाड़े का आरोप
केस दर्ज होने के बाद जांच 19 मई 2025 से शुरू हुई थी। जांच में कथित तौर पर ऐसे अनधिकृत सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन के इस्तेमाल का पता चला, जिनके जरिए बिना अनुमति टोल रसीदें तैयार की जाती थीं। आरोप है कि टोल से प्राप्त रकम को आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम से बाहर भेजा गया।
ED के मुताबिक, फोरेंसिक जांच और NHAI से मिले रिकॉर्ड में इस तरह के सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है। इसके बाद एजेंसी ने मामले से जुड़े संभावित ठिकानों की पहचान की और एक साथ तलाशी की कार्रवाई शुरू की।
1.03 करोड़ रुपये नकद और डिजिटल डिवाइस बरामद
ED की कार्रवाई के दौरान अब तक तलाशी वाले सभी ठिकानों से 1.03 करोड़ रुपये नकद, संदिग्ध दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस बरामद किए गए हैं। एजेंसी इन बरामद सामग्रियों की जांच कर रही है। इससे कथित टोल फर्जीवाड़े में शामिल लोगों और पूरे नेटवर्क से जुड़ी जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
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