चित्रकूट में मंदाकिनी फिर उफान पर, रामघाट डूबा; 15 लोग मंदिर में फंसे

HIGHLIGHTS
- रामघाट की दुकानें, मकान, आश्रम और होटल पानी में डूब गए।
- कामतानाथ, आरोग्यधाम और जानकीकुंड जाने वाले रास्तों पर पानी भर गया।
- भरत मंदिर में पुजारी समेत करीब 15 लोग फंसे हुए हैं।
चित्रकूट। मध्य प्रदेश और पहाड़ी क्षेत्रों में हुई तेज बारिश के बाद मंदाकिनी नदी एक बार फिर उफान पर आ गई है। मंगलवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान 126.50 मीटर को पार कर करीब साढ़े चार मीटर ऊपर पहुंच गया। इसके चलते रामघाट क्षेत्र एक बार फिर पानी में डूब गया। घाट किनारे बनीं दुकानें, मकान, आश्रम और होटल जलमग्न हो गए। रामघाट से कामतानाथ, आरोग्यधाम और जानकीकुंड जाने वाली सड़कों पर भी पानी भर गया, जिसके कारण वहां नावों का सहारा लेना पड़ा।
मंगलवार सुबह चार बजे तक मंदाकिनी का जलस्तर 126.40 मीटर था, जो खतरे के निशान से केवल 10 सेंटीमीटर नीचे था। इसके बाद मध्य प्रदेश और चित्रकूट क्षेत्र में रातभर हुई तेज बारिश के कारण जलस्तर तेजी से बढ़ा और कुछ ही घंटों में स्थिति बिगड़ गई। रामघाट में बाढ़ का पानी फिर भरने से दुकानें दोबारा डूब गईं, जिससे दुकानदारों की परेशानी बढ़ गई।
एक दिन पहले की गई साफ-सफाई भी बाढ़ के पानी में बह गई। घरों और दुकानों में पानी भरने के बाद लोग ऊपरी मंजिलों पर चले गए। होटलों और आश्रमों में ठहरे लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़कें डूब जाने से बाहर निकलना मुश्किल हो गया।
भरत मंदिर में 15 लोग फंसे, मदद का इंतजार
रामघाट स्थित भरत मंदिर में पुजारी समेत करीब 15 लोग पानी के बीच फंसे हुए हैं। पुजारी श्यामजी पांडेय ने बताया कि मंदिर के सभी कमरे पानी में डूब गए हैं और राशन भी खराब हो गया है। अब तक मदद के लिए कोई नहीं पहुंचा है। वहीं, डीएम पुलकित गर्ग ने बताया कि तेज बारिश के कारण मंदाकिनी के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है।
लोगों को बाहर निकलने के लिए लाउडस्पीकर के जरिए अनाउंस किया गया था। काफी लोगों के लिए रैन बसेरों में रुकने और खाने-पीने की व्यवस्था की गई है। अगर किसी भी मंदिर में कोई पुजारी या अन्य लोग रुके हैं तो उन्हें भी बाहर निकाला जाएगा।
कानपुर और आसपास के जिलों में 4 लोगों की मौत
लगातार हो रही बारिश के कारण पिछले 24 घंटों के दौरान कानपुर और आसपास के जिलों में घर गिरने की घटनाओं में चार लोगों की मौत हो गई। कई अन्य लोग घायल हुए हैं। कानपुर के महाराजपुर में मंगलवार सुबह कच्चा मकान गिरने से मलबे में दबकर शकुंतला विश्वकर्मा (56) की मौत हो गई।
हरदोई के बेनीगंज क्षेत्र में सोमवार रात कच्ची दीवार गिरने से मलबे में दबकर हरिपाल (72) की मौत हो गई। वहीं, लोनार में कच्ची कोठरी ढहने से दंपती समेत चार लोग घायल हो गए। बांदा के मरका क्षेत्र में सोमवार को कच्चे मकान की दीवार गिरने से हिमांशु (7) की मौत हो गई। कानपुर देहात के शिवली में मंगलवार सुबह कच्चा घर ढहने से सात माह की मासूम शानवी की मौत हो गई, जबकि बुजुर्ग दंपती समेत चार लोग घायल हो गए।
भरत मंदिर में 15 लोग फंसे
रामघाट स्थित भरत मंदिर में पुजारी समेत करीब 15 लोग पानी के बीच फंसे हुए हैं। पुजारी श्यामजी ने बताया कि मंदिर के सभी कमरे डूब चुके हैं और राशन भी खराब हो गया है। अब तक मदद के लिए कोई नहीं पहुंचा है।
29 अगस्त को आई बाढ़ अब तक की सबसे बड़ी थी। बाढ़ से करीब 563 घरों के क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट सामने आई है। टीमें नुकसान का आकलन कर रही हैं। मंगलवार सुबह फिर आई बाढ़ ने रामघाट, तराँहा सहित कई गांवों को प्रभावित किया है। अब तक 700 से अधिक राशन किट बांटी जा चुकी हैं।
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