जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की सात कोशिशें नाकाम, संवेदनशील सेक्टरों में हाई अलर्ट

HIGHLIGHTS
- 25 जनवरी को सांबा में एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को मार गिराया गया।
- नौशेरा के झंगर इलाके में एक पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी ढेर हुआ।
- उड़ी सेक्टर में भी सुरक्षा बलों ने घुसपैठ की कोशिश विफल की।
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ की कोशिशों को सुरक्षा बलों ने इस साल अब तक सात बार नाकाम किया है। सेना, सीमा सुरक्षा बल (BSF) और जम्मू-कश्मीर पुलिस की सतर्कता के चलते नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) से घुसपैठ की कोशिश करने वाले कई आतंकियों और घुसपैठियों को मार गिराया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने अब सीमा पर निगरानी और कड़ी कर दी है।
अधिकारियों के अनुसार, इस साल घुसपैठ की कोशिशें सांबा, सुंदरबनी, भींबर गली, नौशेरा, उड़ी, पुंछ और राजौरी सेक्टर में सामने आईं। सुरक्षा बलों ने खुफिया सूचनाओं, जमीनी निगरानी और आधुनिक तकनीक की मदद से घुसपैठियों की गतिविधियों का समय रहते पता लगाया।
सांबा से शुरू हुआ सिलसिला
25 जनवरी को सांबा जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को BSF जवानों ने मार गिराया। इसके बाद 19 फरवरी को राजौरी के सुंदरबनी सेक्टर में नाथुआ टिब्बा इलाके में सेना ने घुसपैठ की कोशिश नाकाम की। इस कार्रवाई में सेना की लगातार निगरानी और खुफिया इनपुट की अहम भूमिका रही।
4 मार्च को भींबर गली सेक्टर में आतंकियों की संदिग्ध गतिविधियों का पता चलने के बाद सेना ने कार्रवाई की। इलाके में तलाशी अभियान चलाने के साथ जमीनी और हवाई निगरानी भी बढ़ा दी गई।
नौशेरा और उड़ी में भी घुसपैठ नाकाम
10 मार्च को नौशेरा के झंगर इलाके में दो आतंकियों की गतिविधियों का पता चला। मुठभेड़ में एक पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी मारा गया, जबकि दूसरे की तलाश में अभियान चलाया गया। सेना के अनुसार, इस दौरान घुसपैठ की कोशिश को विफल कर दिया गया।
14-15 मार्च की रात बारामुला जिले के उड़ी सेक्टर के बुच्चर इलाके में भी घुसपैठ की कोशिश नाकाम करते हुए एक आतंकी को मार गिराया गया। इसके बाद पुंछ के कृष्णा घाटी सेक्टर में 12 मई को भारतीय क्षेत्र में करीब 300 मीटर अंदर घुसे सशस्त्र आतंकियों को सुरक्षा बलों ने चुनौती दी। कार्रवाई में लश्कर-ए-तैयबा का एक आतंकी मारा गया।
राजौरी में फिर हुई घुसपैठ की कोशिश
अगस्त के अंतिम दिनों में राजौरी सेक्टर के अग्रिम इलाकों में भी घुसपैठ की गतिविधियां सामने आईं। जवानों ने समय रहते संदिग्ध गतिविधियों को भांप लिया और गोलीबारी कर घुसपैठियों को LoC पार करने से रोक दिया।
ड्रोन से लेकर स्मार्ट फेंसिंग तक, बढ़ी निगरानी
बार-बार हो रही घुसपैठ की कोशिशों को देखते हुए सुरक्षा बलों ने सीमा पर निगरानी का दायरा बढ़ाया है। सेना और BSF संवेदनशील सेक्टरों में संयुक्त रूप से सुरक्षा ग्रिड को मजबूत कर रहे हैं। गुरेज, उड़ी, करनाह, तंगधार, सुंदरबनी और नौशेरा जैसे इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
सीमा निगरानी के लिए हाई-रिजॉल्यूशन और नाइट-विजन कैमरों से लैस ड्रोन व क्वाडकॉप्टर का इस्तेमाल बढ़ाया गया है। संवेदनशील स्थानों पर स्मार्ट फेंसिंग और अन्य तकनीकी उपायों की मदद से घुसपैठ के संभावित रास्तों पर नजर रखी जा रही है। जमीनी निगरानी के साथ हवाई निगरानी को भी सुरक्षा ग्रिड का अहम हिस्सा बनाया गया है।
हाल के महीनों में सीमा के आसपास संदिग्ध ड्रोन गतिविधियां भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय रही हैं। ऐसे मामलों में सुरक्षा बलों ने जमीन पर तलाशी अभियान चलाने के साथ अग्रिम क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई है।
घुसपैठ रोकने के साथ आतंकी नेटवर्क पर भी नजर
सुरक्षा बलों की रणनीति केवल LoC पर घुसपैठ रोकने तक सीमित नहीं है। आतंकियों के मददगारों, हथियार पहुंचाने वाले नेटवर्क और सीमापार से संचालित लॉजिस्टिक तंत्र पर भी कार्रवाई की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां खुफिया इनपुट साझा कर जमीनी और हवाई निगरानी के जरिए संभावित खतरे का पहले ही पता लगाने पर जोर दे रही हैं।
अधिकारियों का कहना है कि सेना, BSF और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल से सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है। संवेदनशील इलाकों में जवान लगातार सतर्क हैं और किसी भी नई घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करने के लिए सुरक्षा ग्रिड को सक्रिय रखा गया है।
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