30 साल पुराने दौसा बस ब्लास्ट केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मौत की सजा रद्द; फिर से चलेगा ट्रायल

HIGHLIGHTS
- सुप्रीम कोर्ट ने 1996 के दौसा बस विस्फोट मामले में अब्दुल हमीद की मौत की सजा रद्द कर दी है और उसके खिलाफ नए सिरे से मुकदमा चलाने का आदेश दिया है।
- अदालत ने कहा कि अब्दुल हमीद को पहले मुकदमे में प्रभावी कानूनी सहायता नहीं मिल सकी, इसलिए दोबारा सुनवाई का निर्देश दिया गया है।
- सुप्रीम कोर्ट ने पप्पू उर्फ सलीम को सभी आरोपों से बरी कर दिया और छह आरोपियों को बरी करने के हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ राजस्थान सरकार की अपील भी खारिज कर दी।
करीब 30 साल पुराने राजस्थान के दौसा बस विस्फोट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मौत की सजा पाए आरोपी अब्दुल हमीद की फांसी की सजा रद्द करते हुए उसके खिलाफ दोबारा मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। वहीं, उम्रकैद की सजा पाए पप्पू उर्फ सलीम को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया है।
इसके अलावा राजस्थान हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की अपील भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी, जिसमें छह आरोपियों को बरी किया गया था। इस फैसले के बाद करीब तीन दशक पुराने मामले में न्यायिक प्रक्रिया एक बार फिर नए चरण में पहुंच गई है।
यह मामला 22 मई 1996 का है। उस दिन आगरा से बीकानेर जा रही एक बस में राजस्थान के दौसा जिले में विस्फोट हुआ था। इस घटना में 14 लोगों की मौत हुई थी। मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने अब्दुल हमीद को मौत की सजा और पप्पू उर्फ सलीम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में राजस्थान हाई कोर्ट ने भी अब्दुल हमीद की फांसी की सजा को बरकरार रखा था। हालांकि, दिसंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी फांसी पर रोक लगा दी थी और अब अंतिम सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा क्यों रद्द की?
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि अब्दुल हमीद को मुकदमे के दौरान प्रभावी कानूनी सहायता नहीं मिल पाई। अदालत ने माना कि बचाव पक्ष की ओर से मामले में उचित तरीके से पैरवी नहीं की गई।
इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के वर्ष 2019 के फैसले को रद्द कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई नए सिरे से की जाए। इसके लिए हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एक विशेष अदालत का गठन करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नए ट्रायल को एक साल के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जाए और इसकी सुनवाई किसी अनुभवी न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली अदालत में हो। साथ ही अब्दुल हमीद को अपनी पसंद का वकील रखने की अनुमति भी दी गई है।
अन्य आरोपियों को लेकर क्या फैसला आया?
सुप्रीम कोर्ट ने पप्पू उर्फ सलीम को सभी आरोपों से बरी कर दिया। उस पर विस्फोट में इस्तेमाल किए गए विस्फोटक उपलब्ध कराने का आरोप था और निचली अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
वहीं, राजस्थान सरकार की ओर से हाई कोर्ट द्वारा छह आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ दाखिल अपील को भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। इससे पहले राजस्थान हाई कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के पांच आरोपियों और आगरा के एक आरोपी समेत छह लोगों को सबूतों के अभाव में बरी किया था।
एक अन्य आरोपी फारुख अहमद खान को बरी किए जाने के फैसले को भी बरकरार रखा गया।
अदालत ने और क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब्दुल हमीद के खिलाफ पूरे मामले की सुनवाई नए सिरे से होगी। अदालत ने साफ किया कि इस बार मुकदमा निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत चलाया जाएगा और आरोपी को पूरा कानूनी अवसर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि अब्दुल हमीद का नाम 26 जनवरी 1996 को जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में बम लगाने के मामले में भी प्रमुख आरोपियों में शामिल रहा है। हालांकि, वर्तमान फैसला केवल दौसा बस विस्फोट मामले से संबंधित है।
अब सभी की नजर नए ट्रायल पर रहेगी, जिससे करीब 30 साल पुराने इस मामले में अंतिम कानूनी निष्कर्ष सामने आएगा।
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