पलवल में बघौला फ्लाईओवर की टूटने लगीं सड़क, गुणवत्ता पर उठे सवाल

पलवल। जिले में हाल ही बने सड़क निर्माण परियोजनाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषकर बघौला फ्लाईओवर, जिसकी लागत करीब 50 करोड़ रुपये थी, निर्माण के तीन माह के भीतर ही क्षतिग्रस्त होने लगा है। फ्लाईओवर की सड़क पर कई जगह गड्ढे और टूट-फूट नजर आ रही है, जिससे वाहन चालकों के लिए जोखिम बढ़ गया है।
रोजाना 70 हजार वाहन करते हैं आवागमन
राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर प्रतिदिन 70 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। बढ़ते ट्रैफिक और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए करीब दस साल पहले इस मार्ग को चार से छह लेन में परिवर्तित किया गया था। जिले की 45 किलोमीटर लंबी सीमा में कई फ्लाईओवर बन चुके हैं, लेकिन बघौला में फ्लाईओवर निर्माण की मांग लंबे समय से थी।
निर्माण में देरी और अतिरिक्त अंडरपास
उद्योगिक क्षेत्र होने के कारण बघौला में भारी वाहन आवागमन होता है। वाहन चालकों और स्थानीय लोगों की मांग पर 2023 में एनएचएआई ने चौधरी कंस्ट्रक्शन कंपनी को डेढ़ किलोमीटर लंबा छह लेन फ्लाईओवर बनाने का काम सौंपा। इसमें देवली अंडरपास भी जोड़ा गया। परियोजना अक्टूबर 2024 में पूरी हुई और जनता के लिए खोली गई, लेकिन सड़क पर गड्ढे और टूट-फूट की शिकायतें लगातार आ रही हैं।
रात में लाइट की समस्या, हादसों का खतरा
फ्लाईओवर पर लाइटें तो लगाई गई हैं, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बावजूद अभी चालू नहीं की गई हैं। रात में अंधेरे में वाहन चालकों को गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ गई है।
सर्विस रोड भी जर्जर
मुख्य फ्लाईओवर के साथ-साथ सर्विस रोड की स्थिति भी गंभीर है। यहां गहरे गड्ढे हैं, जिन्हें राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा नजरअंदाज किया जा रहा है। मीरापुर गांव में सर्विस रोड से मुख्य सड़क पर जाने वाले कट पर भी गड्ढे राहगीरों की परेशानी बढ़ा रहे हैं।
स्थानीय लोग और वाहन चालक प्रशासन से जल्द सुधार की मांग कर रहे हैं। वहीं, फ्लाईओवर की टूटती सड़कें निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और देखरेख पर सवाल खड़े कर रही हैं।
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