उत्तराखंड: भारी बारिश और भूस्खलन के चलते चारधाम-हेमकुंड साहिब यात्रा अस्थायी रूप से रोकी गई

HIGHLIGHTS
- भारी बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए उत्तराखंड में चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।
- प्रशासन ने यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर ठहराने के निर्देश दिए हैं, मौसम सामान्य होने और मार्ग सुरक्षित होने के बाद यात्रा दोबारा शुरू होगी।
- बारिश के कारण प्रदेश में 98 मार्ग बंद हैं, कई इलाकों में जलभराव और नदियों का जलस्तर बढ़ने से परेशानी बढ़ गई है।
उत्तराखंड: प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश और यात्रा मार्गों पर भूस्खलन की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया है। मौसम के सामान्य होने और मार्ग सुरक्षित होने के बाद ही यात्रा दोबारा शुरू की जाएगी।
मौसम विज्ञान विभाग ने प्रदेश में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। चारधाम यात्रा मार्गों पर कई स्थानों पर भूस्खलन की स्थिति को देखते हुए सोमवार को एहतियात के तौर पर यात्रा संचालन कुछ समय के लिए रोकने का फैसला लिया गया।
गढ़वाल मंडलायुक्त आनंद स्वरूप ने रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी और उत्तरकाशी के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यात्रा मार्गों पर मौजूद श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर ठहराया जाए। उन्होंने कहा कि मार्ग पूरी तरह सुरक्षित होने के बाद ही यात्रियों को आगे बढ़ने की अनुमति दी जाए।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्रा रोकने का निर्णय यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए वर्तमान मौसम और मार्गों की स्थिति को देखते हुए लिया गया है। परिस्थितियां सामान्य होने और मार्ग सुरक्षित होने के बाद यात्रा फिर से शुरू कर दी जाएगी।
अब तक 45 लाख श्रद्धालु कर चुके दर्शन
चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा में अब तक 45 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। हालांकि बारिश के कारण यात्रियों की संख्या में काफी कमी आई है। जून की शुरुआत में जहां एक दिन में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 90 हजार से एक लाख तक पहुंच गई थी, वहीं अब यह संख्या 10 हजार से भी कम रह गई है।
अब तक बदरीनाथ धाम में 15.22 लाख, केदारनाथ धाम में 14.15 लाख, गंगोत्री में सात लाख, यमुनोत्री में 6.47 लाख और हेमकुंड साहिब में 2.08 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।
बारिश से बाढ़ जैसे हालात, कई मार्ग बंद
उत्तराखंड में मानसून के सक्रिय होने के बाद लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, जबकि पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन के कारण कई सड़कें बंद हो गई हैं।
देहरादून में बारिश का असर ज्यादा देखने को मिला। यहां निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी हुई। कई कॉलोनियों में पानी घरों तक पहुंच गया और सड़कों पर जलभराव के कारण जाम की स्थिति भी बनी।
पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे आसपास के इलाकों में खतरा बढ़ गया है।
98 मार्गों पर यातायात प्रभावित
प्रदेश में भूधंसाव और भूस्खलन के कारण सोमवार को 98 मार्ग बंद रहे। देहरादून में देहरादून-मसूरी राज्य मोटर मार्ग पर भूधंसाव के कारण यातायात बाधित हुआ। जिले में कुल 10 मार्ग बंद हैं।
अल्मोड़ा में सात, बागेश्वर में 10 और रुद्रप्रयाग में सात ग्रामीण मार्ग बंद हैं। चमोली जिले में सिमली-ग्वालदम राष्ट्रीय राजमार्ग मलबा आने से बंद है। यहां 25 ग्रामीण मार्ग भी प्रभावित हैं।
पिथौरागढ़ में 14 ग्रामीण मोटर मार्ग, नैनीताल में एक राज्य मार्ग और पांच ग्रामीण मोटर मार्ग, उत्तरकाशी में दो ग्रामीण मोटर मार्ग, चंपावत में तीन और टिहरी में नौ ग्रामीण मोटर मार्ग बाधित हैं।
किच्छा में 130 एमएम बारिश दर्ज
राज्य में बारिश का दौर जारी है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार किच्छा में 130 एमएम बारिश दर्ज की गई। वहीं देहरादून के मालदेवता क्षेत्र में 103 एमएम, हाथी बड़कला में 75 एमएम, अल्मोड़ा में 52 एमएम, खटीमा में 75 एमएम और ऊखीमठ में 77 एमएम बारिश दर्ज की गई।
बारिश के कारण नदियों का जलस्तर भी बढ़ गया है। उत्तरकाशी में भागीरथी नदी का जलस्तर 1119 मीटर तक पहुंच गया है, जबकि खतरे का स्तर 1123 मीटर है। बदरीनाथ में अलकनंदा नदी का जलस्तर 3111 मीटर तक पहुंच गया है, जबकि खतरे का स्तर 3113 मीटर है।
इसके अलावा पिंडर नदी, देवप्रयाग में गंगा नदी, ऋषिकेश और हरिद्वार में भी जलस्तर बढ़ा हुआ है।
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