विकास दुबे का 2,256 दिन बाद दस्तावेजों में भी हुआ अंत, जारी हुआ मृत्यु प्रमाण-पत्र

HIGHLIGHTS
- विकास दुबे की मौत 10 जुलाई 2020 को मुठभेड़ में हुई थी।
- पिता का नाम गलत दर्ज होने से प्रमाण-पत्र जारी नहीं हो पाया था।
- पत्नी ऋचा दुबे ने इसके लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
कानपुर। आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले में कुख्यात विकास दुबे का 2,256 दिन यानी करीब छह साल बाद आखिरकार दस्तावेजों में भी अंत हो गया है। कानपुर नगर निगम के जोन-चार से उसका मृत्यु प्रमाण-पत्र करीब 11 सितंबर को जारी किया गया। जोनल अधिकारी के मुताबिक, विकास दुबे का मृत्यु प्रमाण-पत्र कोर्ट की ओर से भेजे गए पते पर रजिस्टर्ड डाक के जरिए भेजा गया है। गांव में प्रमाण-पत्र पहुंचने के बाद इसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।
बिकरू कांड के बाद यूपी पुलिस और एसटीएफ ने 10 जुलाई 2020 को मुठभेड़ में विकास दुबे को मार गिराया था। हालांकि, इसके बाद भी सरकारी दस्तावेजों में वह जीवित दर्ज था।
पिता का नाम गलत दर्ज होने से अटका था प्रमाण-पत्र
विकास दुबे की मौत के बाद उसका मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी नहीं हो सका था। पंचनामा और दाहसंस्कार की पर्ची में उसके पिता का नाम गलत दर्ज हो गया था। पिता के नाम के तौर पर रामकुमार दुबे की जगह राजकुमार दुबे दर्ज था। इसी वजह से मृत्यु प्रमाण-पत्र बनने में दिक्कत आ रही थी।
विकास दुबे की पत्नी ऋचा ने कई वर्षों तक विभाग और अधिकारियों के चक्कर लगाए, लेकिन प्रमाण-पत्र जारी नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी करने की मांग की।
मामले में हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग से आख्या मांगी थी। इसके बाद कानपुर के सीएमओ डॉ. हरीदत्त नेमी मामले की जांच के लिए पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। जांच के बाद विकास दुबे का मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी हो सका।
बीमा और संपत्ति के मामलों में आ रही थी दिक्कत
ऋचा दुबे ने अपनी याचिका में कहा था कि दस्तावेजों में विकास दुबे को मृत नहीं माना गया था। इसके कारण उसके नाम पर हुई बीमा पॉलिसी का लाभ नॉमिनी को नहीं मिल पा रहा था। इसके अलावा विकास दुबे के नाम दर्ज संपत्ति और जमीन भी उसके वारिसों के नाम पर स्थानांतरित नहीं हो पा रही थी। इससे अलग-अलग कामों में परेशानी आ रही थी।
जुलाई 2020 में हुआ था बिकरू कांड
दो जुलाई 2020 को चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में विकास दुबे को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस टीम के वाहनों को पहले से बनाई गई योजना के तहत जेसीबी लगाकर रोक दिया गया था। पुलिसकर्मी जब अपने वाहनों से उतरकर जेसीबी को पार करते हुए विकास दुबे के घर की ओर बढ़े, तभी उसके घर की छत और आसपास के मकानों से पुलिस टीम को घेरकर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई।
इस घटना में सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी। इसके बाद यूपी पुलिस और एसटीएफ ने मिलकर बिकरू कांड से जुड़े छह अपराधियों को मुठभेड़ में मार गिराया था।
11 सितंबर को जारी हुआ मृत्यु प्रमाण-पत्र
विकास दुबे का मृत्यु प्रमाण-पत्र 11 सितंबर को जारी किया गया है। इसे कोर्ट की ओर से भेजे गए बिकरू के पते पर रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से भेज दिया गया है। इस तरह करीब छह साल बाद विकास दुबे की मौत सरकारी दस्तावेजों में भी दर्ज हो गई है।
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