लश्कर कमांडर सैफुल्ला के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी, पहलगाम हमले समेत कई घटनाओं से जुड़ा नाम

HIGHLIGHTS
- सैफुल्ला पाकिस्तान के कसूर जिले के चंगा मांगा गांव का रहने वाला बताया गया है।
- आतंकी संगठन में उसे कई अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है।
- NIA के मुताबिक, वह 2005 से 2007 के बीच कुलगाम में कमांडर रहा था।
जम्मू की विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी अदालत ने पाकिस्तान में मौजूद लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर सैफुल्ला के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। अधिकारियों के मुताबिक, सैफुल्ला का नाम अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले सहित कई बड़ी आतंकी घटनाओं से जुड़ा है।
सैफुल्ला पाकिस्तान के कसूर जिले के चंगा मांगा गांव का रहने वाला बताया गया है। आतंकी संगठन में उसकी पहचान साजिद जट्ट, अली भाई, हबीबुल्लाह मलिक, लंगड़ा, नूमी, नुमान, उस्मान हबीब और शानी जैसे नामों से भी बताई जाती है। अधिकारियों के अनुसार, वह दो दशकों से अधिक समय से आतंकी गतिविधियों में सक्रिय है और लश्कर-ए-तैयबा के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।
कश्मीर में आतंकी नेटवर्क से जुड़ा मामला
यह कार्रवाई राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा पाकिस्तान से संचालित लश्कर-ए-तैयबा के एक नेटवर्क का पता लगाए जाने के बाद हुई है। एजेंसी ने अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा के नेतृत्व वाले आतंकी समूह का खुलासा किया था। अब्दुल्ला को इस साल की शुरुआत में पाकिस्तानी नागरिक उस्मान उर्फ खुबैब और तीन स्थानीय सहयोगियों के साथ गिरफ्तार किया गया था।
अधिकारियों के अनुसार, 8 सितंबर को विशेष अदालत की ओर से जारी आदेश में बताया गया कि मामले की शुरुआत मार्च में श्रीनगर के पंडाच इलाके में लश्कर-ए-तैयबा के एक सदस्य की गिरफ्तारी के बाद हुई। जांच आगे बढ़ने के साथ पूरे नेटवर्क का पता चला। अब्दुल्ला करीब 16 वर्षों से फरार था और उसने जम्मू-कश्मीर से बाहर भी अपने ठिकाने बना रखे थे।
हथियार, धन और निर्देश पहुंचाने का आरोप
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि सैफुल्ला पाकिस्तान से कश्मीर घाटी में सक्रिय आतंकियों को हथियार, धन और निर्देश मुहैया करा रहा था। एजेंसी के अनुसार, उसे गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून की चौथी अनुसूची के तहत आतंकवादी घोषित किया जा चुका है।
जांच एजेंसी ने यह भी बताया कि गिरफ्तार पाकिस्तानी आतंकियों में से एक के पास सैफुल्ला से जुड़ी टेलीग्राम पहचान मिली हैं। एजेंसी के मुताबिक, इनसे कथित तौर पर सामने आया कि सैफुल्ला सुरक्षा बलों, आम नागरिकों और सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के लिए निर्देश देता था।
अदालत ने जारी किया गैर-जमानती वारंट
राष्ट्रीय जांच एजेंसी की दलीलें सुनने और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद विशेष अदालत ने सैफुल्ला के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया। अदालत ने माना कि आरोपी अभी फरार है और जांच एजेंसी उसे सामान्य प्रक्रिया के माध्यम से अदालत के सामने पेश नहीं कर सकी है।
वारंट कुलगाम के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भेजा गया है। अधिकारियों के अनुसार, सैफुल्ला का आखिरी ज्ञात पता दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के यमराच गांव का बताया गया है। कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई के लिए वारंट राष्ट्रीय जांच एजेंसी के माध्यम से संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया गया है।
2005 से आतंकी गतिविधियों में सक्रिय होने का दावा
राष्ट्रीय जांच एजेंसी के अनुसार, सैफुल्ला ने 2005 से 2007 के बीच कुलगाम जिले में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी कमांडर के तौर पर काम किया था। इसके बाद वह पाकिस्तान चला गया और वहीं से संगठन की गतिविधियों को संचालित करने लगा।
जांच एजेंसी अब सैफुल्ला की गिरफ्तारी के साथ उसके आतंकी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
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