बांके बिहारी मंदिर में व्यवस्थाओं को लेकर मंथन, चढ़ावे और निजी बैंक में फंड जमा करने पर मांगे दस्तावेज

HIGHLIGHTS
- परंपरागत झूलों और सिंहासनों की स्थापना न होने के कारणों की जांच होगी
- एसएसपी, एमवीडीए उपाध्यक्ष और नगर आयुक्त को जांच समिति में शामिल किया गया
- भंडारियों द्वारा भक्तों से सीधे चढ़ावा लेने की प्रक्रिया पर चर्चा हुई
वृंदावन के ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर हाईपावर्ड मैनेजमेंट कमेटी की 19वीं बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। ठाकुर जी को भेंट किए गए स्वर्ण-रजत हिंडोला (झूला), रथ, रजत शेष सिंहासन, स्वर्ण व रजत नौका, हाथी सूंढ़ सिंहासन, सूर्यप्रभा सिंहासन और चंद्रप्रभा सिंहासन को मंदिर में परंपरा के अनुसार नहीं लगाए जाने के मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई है।
सर्वसम्मति से गठित जांच कमेटी में एसएसपी, एमवीडीए की अध्यक्ष और नगरायुक्त को शामिल किया गया है। कमेटी कई बिंदुओं पर मामले की पड़ताल करेगी। बताया गया कि जगन्नाथ रथयात्रा में ठाकुरजी चांदी के रथ पर और सावन में महाशिवरात्रि पर चांदी के शेषनाग पर विराजते थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। इसके अलावा मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े कई अन्य मामलों पर भी बैठक में मंथन हुआ।
लक्ष्मण शहीद स्मारक में हुई बैठक की अध्यक्षता इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एवं समिति अध्यक्ष अशोक कुमार ने की। बैठक में मंदिर प्रबंधन से संबंधित व्यवस्थाओं में सामने आ रही कथित अनियमितताओं पर चर्चा की गई। चढ़ावे की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए। बताया गया कि कुछ भंडारी और अन्य लोग श्रद्धालुओं के हाथ से चढ़ावा ले रहे थे।
चढ़ावे की प्रक्रिया पर भी चर्चा
इस व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश और मंदिर की गरिमा के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। बैठक में कहा गया कि मंदिर की व्यवस्थाओं में भंडारियों की निर्धारित संख्या और प्रक्रिया का पालन जरूरी है। श्रद्धालुओं का चढ़ावा मंदिर के खजाने में ही जाना चाहिए। सेवायतों से भगवान के श्रृंगार और सेवा को परंपरा के अनुसार भव्य बनाए रखने की अपेक्षा की गई।
जांच कमेटी को लेकर सेवायत हिमांशु गोस्वामी ने कहा कि उन्होंने कमेटी में एक सेवायत को शामिल किए जाने का सुझाव दिया था, लेकिन उनकी बातों को अनसुना कर दिया गया। इसके अलावा सफाई कर्मचारियों के बकाया भुगतान और सफाई व्यवस्था का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। चर्चा में सामने आया कि पूर्व सफाई एजेंसी जीएसटी में पंजीकृत नहीं थी, जिसके चलते उसे ब्लैकलिस्ट किया गया। इसके बावजूद सफाईकर्मियों ने मंदिर की सफाई व्यवस्था में कमी नहीं आने दी। इस पर अध्यक्ष अशोक कुमार ने कहा कि नई एजेंसी नियुक्त की जा रही है और कर्मचारियों को भुगतान कराया जाएगा।
प्रसाद की गुणवत्ता और वितरण पर सवाल
मंदिर के प्रसाद की गुणवत्ता और वितरण के तरीके को लेकर भी बैठक में सवाल उठे। अध्यक्ष अशोक कुमार ने कहा कि बैठक में निर्णय लिया गया है कि मंदिर में ठाकुरजी की ओर पेड़े और मालाएं नहीं फेंकी जाएंगी। रक्षाबंधन के दौरान राखी में पेड़े बांधकर फेंके गए थे, यह प्रक्रिया ठीक नहीं है।
समिति की ओर से प्रसाद को श्रद्धालुओं तक सम्मानजनक और व्यवस्थित तरीके से पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया गया। मंदिर में फूलों की सजावट को लेकर भी नई व्यवस्था पर विचार किया गया, लेकिन इस पर सेवायतों ने इनकार कर दिया।
निजी बैंक में फंड जमा करने पर मांगे दस्तावेज
मंदिर की बैंकिंग व्यवस्था भी बैठक में चर्चा का अहम विषय रही। सेवायत सदस्यों ने कहा कि समिति की पिछली बैठक में निजी बैंकों को फंड नहीं देने के निर्देश के बावजूद निजी बैंक में फंड जमा किया जा रहा है। इस पर सेवायत सदस्यों ने संबंधित दस्तावेज और कागजात मांगे हैं।
इसके साथ ही समिति द्वारा कार्यभार संभालने के बाद से बैंकों ने मंदिर और श्रद्धालुओं के हित में कौन-कौन से कार्य किए तथा उन पर कितना खर्च हुआ, इसका भी विवरण मांगा गया।
सेवायत सदस्य हिमांशु गोस्वामी ने बताया कि सेवायतों ने बैठकों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए वीडियो रिकॉर्डिंग कराने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि कमेटी के पदाधिकारी सेवायतों के सुझाव पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने बैठक में सुयोग्य मीडिया को किए गए 98 लाख रुपये के भुगतान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया।
समिति के सदस्यों ने पूछा कि इतनी बड़ी राशि का भुगतान किस आधार, किस प्रक्रिया और किस कार्य के लिए किया गया। इस संबंध में भी जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया। मंदिर के कर्मचारियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई।
राधाष्टमी और हरिदास जी के प्राकट्योत्सव की तैयारियां
आगामी पर्वों को देखते हुए मंदिर की व्यवस्थाओं पर भी चर्चा की गई। 19 सितंबर को राधाष्टमी और हरिदास जी के प्राकट्योत्सव को लेकर आवश्यक तैयारियों और मंदिर की सजावट पर विचार हुआ। इस वर्ष आयोजन के लिए धनराशि बढ़ाकर पांच लाख रुपये किए जाने की जानकारी दी गई। पिछले वर्ष आयोजन पर करीब 4.49 लाख रुपये खर्च हुए थे।
बैठक में समिति अध्यक्ष अशोक कुमार, सदस्य मुकेश मिश्रा, जिला एवं सत्र न्यायाधीश विकास कुमार, मुंसिफ/सिविल जज प्रत्यूष आनंद मिश्रा, जिलाधिकारी एवं सदस्य सचिव चंद्र प्रकाश सिंह, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लक्ष्मी एन., एएसआई आगरा की अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. स्मिता एस. कुमार और सेवायत रजत गोस्वामी, हिमांशु गोस्वामी, शैलेंद्र गोस्वामी और गोपेश गोस्वामी मौजूद रहे।
सेवायत की तबीयत हुई खराब
बैठक के दौरान सेवायत शैलेंद्र गोस्वामी की अचानक तबीयत खराब हो गई। उनका ब्लड प्रेशर हाई हो गया, जिसके बाद वह बैठक को बीच में छोड़कर चले गए। सेवायत हिमांशु गोस्वामी ने बताया कि बैठक में परिचर्चा के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई थी।
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