बिजनौर मेडिकल कॉलेज में फिर रैगिंग का आरोप, जूनियर छात्र का मुंडवाया सिर

HIGHLIGHTS
- छात्र के पिता ने NMC से की रैगिंग की शिकायत।
- हॉस्टल में शाम 5 से 7 बजे तक रैगिंग का आरोप।
- शिकायत में 10 से 13 सीनियर छात्रों के नाम और कमरा नंबर दर्ज।
बिजनौर: महात्मा विदुर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में रैगिंग का मामला एक बार फिर सामने आया है। आरोप है कि मेडिकल कॉलेज के सीनियर छात्रों ने जूनियर छात्र की रैगिंग करते हुए उसका सिर मुंडवा दिया। पीड़ित छात्र के पिता ने इस मामले में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से शिकायत की है। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए एनएमसी ने कॉलेज की प्राचार्या से जूनियर एमबीबीएस छात्रों के साथ हुई रैगिंग, मानसिक उत्पीड़न और अभद्रता के मामले में 24 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट मांगी है।
छात्र के पिता ने अपनी शिकायत में हॉस्टल प्रशासन पर भी मामले को दबाने का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, बॉयज हॉस्टल में जूनियर छात्रों के साथ लगातार रैगिंग और अभद्रता की जा रही है। साथ ही उन्हें धमकियां भी दी जा रही हैं। आरोप है कि हॉस्टल में रोजाना शाम पांच बजे से सात बजे के बीच जूनियर एमबीबीएस छात्रों को रैगिंग का सामना करना पड़ता है।
शिकायतकर्ता ने वर्ष 2024 बैच के सीनियर छात्रों पर रैगिंग करने का आरोप लगाया है। शिकायत में 10 से 13 सीनियर छात्रों के नाम और उनके कमरों के नंबर भी दर्ज किए गए हैं। रैगिंग के कारण छात्र मानसिक रूप से परेशान है। इस घटना का असर जूनियर छात्रों की पढ़ाई पर भी पड़ने की आशंका जताई गई है। इससे पहले भी मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का मामला सामने आ चुका है। ताजा शिकायत के बाद एनएमसी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्राचार्या से 24 घंटे के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) मांगी है।
हॉस्टल वार्डन पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप
शिकायत में बताया गया है कि पीड़ित छात्र ने रैगिंग की जानकारी हॉस्टल वार्डन को भी दी थी। इसके बावजूद आरोप है कि वार्डन ने मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई और बिना किसी ठोस कार्रवाई के मामले को छोड़ दिया। एनएमसी के एंटी-रैगिंग सेल के अधिकारी ने शिकायत में उठाए गए सभी 11 बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब मांगा है।
अप्रैल में 11 छात्रों पर हुई थी कार्रवाई
महात्मा विदुर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में रैगिंग का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले अप्रैल 2026 में भी एक छात्र के साथ रैगिंग की घटना सामने आई थी। उस मामले में कॉलेज प्रशासन ने 11 छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की थी।
कार्रवाई के तहत एक छात्र पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाने के साथ छह सप्ताह के लिए निलंबित किया गया था। दूसरे छात्र पर 10 हजार रुपये जुर्माना और चार सप्ताह का निलंबन लगाया गया था। वहीं, एक अन्य छात्र को पांच हजार रुपये जुर्माने के साथ दो सप्ताह के लिए निलंबित किया गया था। इसके अलावा आठ छात्रों को दो-दो सप्ताह के निलंबन की सजा दी गई थी।
निलंबन के बाद भी रैगिंग के आरोप
मिली जानकारी के अनुसार, अप्रैल में रैगिंग के मामले में कई छात्रों को निलंबित किया गया था। ताजा शिकायत में रैगिंग के आरोपों के बीच उन चार छात्रों के नाम भी सामने आए हैं, जिन पर पहले भी रैगिंग करने का आरोप लगा था। इससे निलंबन की कार्रवाई के बाद भी छात्रों के व्यवहार में सुधार नहीं होने की बात सामने आई है।
एंटी-रैगिंग कमेटी की भूमिका पर सवाल
मेडिकल कॉलेज में रैगिंग रोकने के लिए 19 सदस्यीय एंटी-रैगिंग कमेटी गठित है। कमेटी की अध्यक्ष प्राचार्या हैं। इसमें 10 फैकल्टी सदस्य और आठ विद्यार्थी शामिल हैं। इसके बावजूद जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग की शिकायत सामने आने से कमेटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। कॉलेज में रैगिंग की घटनाएं सामने आने के बाद कमेटी की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
यह बोलीं प्राचार्या
प्राचार्या डॉ. ललिता चौधरी ने बताया कि रैगिंग मामले की प्राथमिक जांच कर एनएमसी को रिपोर्ट भेज दी गई है। रैगिंग में जिन सीनियर छात्रों के नाम सामने आए हैं, उनके अभिभावकों को कॉलेज बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि चेतावनी के बाद भी छात्रों में सुधार नहीं हुआ तो उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. ललिता चौधरी, प्राचार्या, मेडिकल कॉलेज, बिजनौर
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