सोनम वांगचुक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस, अंतरिम आदेश देने से किया इनकार

HIGHLIGHTS
- दिल्ली हाईकोर्ट ने सोनम वांगचुक मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और फिलहाल कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार किया।
- कोर्ट ने सोनम वांगचुक के साथ मौजूद उनकी पत्नी और अन्य लोगों के लिए अलग रेस्ट रूम की व्यवस्था करने तथा उनसे मिलने की अनुमति देने के निर्देश दिए।
- सुनवाई में स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई गई। सरकार ने बताया कि 18 दिन के उपवास के कारण किडनी फंक्शन प्रभावित हुआ है और डॉक्टर लगातार निगरानी कर रहे हैं।
नई दिल्ली। सोनम वांगचुक से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और विवेक तंखा कोर्ट में मौजूद रहे, जबकि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने केंद्र सरकार की ओर से पक्ष रखा। अदालत ने फिलहाल कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया है।
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए सोनम वांगचुक के साथ मौजूद उनकी पत्नी और अन्य लोगों के लिए अलग रेस्ट रूम उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें सोनम वांगचुक से मिलने की अनुमति दी जाएगी। यह सुनवाई उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो की ओर से दाखिल याचिका पर हुई।
सिब्बल ने मांगी रिहाई, निजी अस्पताल में इलाज की मांग
सोनम वांगचुक की ओर से बहस शुरू करते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि वह रिहाई चाहते हैं। उन्होंने बताया कि मेदांता अस्पताल से बातचीत की गई है और वांगचुक को अपने वकील और डॉक्टर से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
वहीं, एएसजी चेतन शर्मा ने कहा कि सरकार इस मामले को देख रही है। उन्होंने 16 जुलाई के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि उसमें सरकारी डॉक्टरों द्वारा नियमित जांच और जरूरत पड़ने पर मेडिकल हस्तक्षेप के निर्देश दिए गए थे।
18 दिन की फास्टिंग से किडनी पर असर
चेतन शर्मा ने अदालत के सामने सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य रिपोर्ट रखी। उन्होंने बताया कि वांगचुक डायबिटिक नहीं हैं, लेकिन 18 दिनों के उपवास के कारण किडनी के कामकाज पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि उन्हें बिना शुगर वाले इलेक्ट्रोलाइट्स दिए जा रहे हैं और उन्हें सरकारी डॉक्टरों पर भरोसा रखना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर सोनम वांगचुक को एम्स में शिफ्ट किया जा सकता है। इस पर पीठ ने पूछा कि क्या उनके साथ मौजूद तीमारदारों के लिए अलग व्यवस्था की गई है। चेतन शर्मा ने कहा कि उन्हें जगह उपलब्ध कराई गई है।
शुगर और पोटेशियम का स्तर कम होने की जानकारी
एम्स के डॉ. अक्षय ने कोर्ट को बताया कि वह एम्स में अतिरिक्त प्रोफेसर हैं और सोनम वांगचुक का इलाज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें बिना शुगर वाले इलेक्ट्रोलाइट्स और पोटेशियम दिया जा रहा है।
डॉक्टर ने बताया कि उन्हें आईवी के जरिए विटामिन देने की जरूरत है, लेकिन वांगचुक ने इसके लिए मना कर दिया है। उनके शरीर के कई पैरामीटर सामान्य सीमा के करीब हैं। उन्होंने कहा कि शुगर और पोटेशियम का स्तर भी काफी कम है और शरीर को कार्बोहाइड्रेट व पोटेशियम की जरूरत है।
अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज की मांग
कपिल सिब्बल ने कहा कि सोनम वांगचुक हिरासत में नहीं हैं और एक स्वतंत्र नागरिक होने के नाते उन्हें अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि 16 जुलाई का आदेश आने के समय वांगचुक इस मामले में पक्षकार नहीं थे और वह अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि मेदांता एक विश्वस्तरीय अस्पताल है और यदि एम्स के डॉक्टर भी इलाज में शामिल होना चाहें तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि सरकारी डॉक्टरों पर अविश्वास क्यों किया जा रहा है। सिब्बल ने कहा कि सरकारी डॉक्टरों पर कोई अविश्वास नहीं है, लेकिन वांगचुक अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज चाहते हैं।
सरकार ने कहा- पूरी सतर्कता बरती जा रही है
सरकार की ओर से चेतन शर्मा ने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बंधी हुई है और इस मामले में पूरी सतर्कता बरती जा रही है। इसी दौरान एक डॉक्टर ने कहा कि वांगचुक डॉक्टरों पर भरोसा नहीं करने की बात कह रहे हैं और यह विश्वास का विषय है।
इसके जवाब में सिब्बल ने कहा कि वांगचुक का ब्लड प्रेशर बढ़ रहा है और अस्पताल के कमरे में पुलिसकर्मी मौजूद है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तरह मरीज का इलाज किया जा सकता है।
इस पर चेतन शर्मा ने इस दावे को गलत बताते हुए कहा कि अस्पताल के कमरे में कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं है।
क्या है मामला
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने आरोप लगाया है कि बार-बार अनुरोध के बावजूद अस्पताल प्रशासन उन्हें डिस्चार्ज करने या निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति नहीं दे रहा है।
उन्होंने दावा किया कि वार्ड के बाहर करीब 30 पुलिसकर्मी और अस्पताल परिसर में 100 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं, जिससे उनकी आवाजाही प्रभावित हो रही है। वांगचुक की पत्नी ने इसे चिकित्सकीय देखभाल के बजाय 'अवैध हिरासत' बताया है।
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