राम मंदिर चढ़ावा चोरी: 67 गणना कर्मियों के शामिल होने की खबर, पुलिस ने दाखिल की चार्जशीट

HIGHLIGHTS
- आरोप पत्र में चोरी की घटना का सिलसिलेवार विवरण दर्ज किया गया है।
- तत्कालीन महासचिव चंपतराय को घटना का पहला वीडियो भेजा गया था।
- वीडियो में बाथरूम के अंदर नोटों की गड्डियां दिखाई गई थीं।
अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की रकम चोरी होने के मामले में पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। आरोप पत्र में चोरी की घटना का सिलसिलेवार विवरण दर्ज किया गया है। इससे सामने आता है कि चढ़ावा चोरी के सिंडिकेट का खुलासा गणना कर्मियों ने ही किया था।
इसी दौरान तत्कालीन महासचिव चंपतराय को घटना का पहला वीडियो भी गणना कर्मियों ने ही भेजा था। उन्हें मैसेज के जरिए यह भी बताया गया कि चोरी की गणना में 67 लड़के शामिल हैं।
महासचिव चंपतराय को घटना की सबसे पहले जानकारी आनंद कुमार चौधरी ने दी थी। चार जून को जब चंपतराय दिल्ली से अयोध्या आ रहे थे, उसी दौरान उन्हें दो अलग-अलग मोबाइल नंबरों से वीडियो और लिखित मैसेज मिले। वीडियो में बाथरूम के अंदर नोटों की गड्डियां दिखाई दे रही थीं।
कई दिनों से चढ़ावे की रकम चोरी कर रहे थे
चोरी की गई रकम करीब सवा दो लाख रुपये थी, जिसे बाद में बरामद कर लिया गया। आरोप है कि कुछ लड़के कई दिनों से रुपये चोरी कर रहे थे। इनकी संख्या 67 बताई गई है।
अगले दिन पांच मई को चंपतराय के कारसेवकपुरम स्थित आवास पर दोपहर के समय ट्रस्टी डॉ. अनिल कुमार मिश्र, गोपाल राव और नरेंद्र पहुंचे। नरेंद्र के लैपटाप से कुछ वीडियो दिखाए गए। इनमें गणना कक्ष में दान और चढ़ावे की रकम की गिनती के दौरान गणना कर्मियों को रुपये चोरी करते हुए दिखाया गया था।
गवाह आनंद चौधरी ने पुलिस को क्या बताया
गवाह आनंद चौधरी ने बताया कि चार जून को ड्यूटी खत्म होने के बाद जब घर जाने का समय हुआ तो उन्हें गणना कक्ष में मौजूद बैंक और ट्रस्ट के कर्मचारियों ने रोक लिया। इनमें बैंक की ओर से सत्या, ट्रस्ट के विनय श्रीवास्तव, गणना कर्मी मदन गोपाल निगम, आकाश गौड़, रितिक सिंह और एक अन्य कर्मी शामिल था।
एक कर्मी ने पुलिस को बताया कि तीन जून को उसकी ड्यूटी कैश काउंटिंग की दूसरी पाली में लगी थी। उस दिन उसके साथ करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, अविनाश शुक्ल और अनुकल्प मिश्र भी थे। आरोप है कि ये लोग दान में मिले रुपये चोरी से उठाकर मेज के नीचे अपनी कमर में छिपा रहे थे।
चार जून को अविनाश को संत प्रसाद वर्मा ने चोरी करते हुए देख लिया। इसके बाद सभी लोग बाथरूम के पीछे जाकर आपस में बातचीत करने लगे। इसकी जानकारी विनय श्रीवास्तव और बैंक कर्मचारी सत्य प्रकाश को दी गई।
इसके बाद गणना कक्ष में चेकिंग शुरू कर दी गई। आरोप है कि चेकिंग होती देखकर आरोपियों ने चोरी की रकम बाथरूम में छिपा दी। तलाशी के दौरान यही रकम बरामद हुई। विनय श्रीवास्तव ने बरामद धनराशि को बाक्स में सुरक्षित रखवा दिया था।
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